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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

भक्तिमार्ग का सर्वश्रेष्ठ ग्रन्थ : आर्याभिविनय‌

आर्याभिविनय ग्रन्थ का महत्व:

धर्म, आचार और भक्ति इन शब्दों का दुरुपयोग संसार में जितना हो रहा है, उतना शायद ही किसी शब्द का हुआ होगा । धर्म, आचार और भक्ति के ही नाम पर इतने बड़े बड़े अत्याचार संसार में हुए हैं कि उनकी गणना नहीं हो सकती । अभी जो गणेष चतुर्थी पर मूर्तियों को जल समाधी दी गयी है इसमें कौनसी भक्ति भावना है, समझ से परे है ।
इन मिथ्या भक्तियों से पृथक करने के विचार से ही परम तपस्वी, परम ईश्वर भक्त महायोगी, जितेन्द्रय निष्पक्षपात महर्षि दयानन्द ने भक्तिमार्ग के सर्वश्रेष्ठ ग्रन्थ "आर्याभिविनय" की वेदमन्त्रों के आधार पर विलक्षण रचना की यह कोई कल्पना पर आधारित नहीं है ।
संसार में प्राय: यही देखा जाता है कि यम नियमों का पालन किये बिना ही लोग भक्त बनना चाहते हैं । ऐसे मार्ग पर चलाने वाले "कनफुकवे" गुरुओं की ही आजकल दाल गलती है अत" आर्य बन्धुओ, आर्याभिविनय ग्रन्थ के महत्त्व को समझो इसमें ईश्वरभक्ति का प्रवाह ठाठें मार रहा है । आपको झुठे गुरुओं के पीछे भटकने की आवश्यकता नहीं है ।
मैं पं. देवनारायण भारद्वाज रचित "गीत स्तुति" के माध्यम से "आर्याभिविनय" के वेद मन्त्रों का काव्यानुवाद भक्तों की भक्ति को जागृत करने के प्रयोजन से प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहा हूँ । इन मन्त्रों को कण्ठाग्र करो, मन लगाकर पाठ करो, और सच्ची श्रद्धा से करो । फिर देखो, दिन प्रतिदिन आप को जो आनन्द आयेगा, ईश्वर भक्ति की जो मस्ती आप अनुभव करेंगे, वह बढ़ती ही चली जायेगी । यह ग्रन्थ जहाँ ईश्वर भक्ति के भावों से भरा पड़ा है, वहां देश भक्ति के भावों की भी इसमें कमी नहीं है ।
ईश्वर भक्ति में महर्षि दयानन्द सबसे बढ़े हुए हैं, संसार भर के देश भक्तों के वे शिरोमणी हैं । महर्षि दयानन्द तू, धन्य है।।।।

राजेन्द्र आर्य
90413 42483
email: rajenderarya49@gmail.com

आर्याभिवि

आर्याभिविनय भक्ति ग्रन्थ में कुल 108 मन्त्र हैं

प्रथम प्रकाश ऋग्वेद के ५३ मन्त्र

द्वितीय प्रकाश यजुर्वेद के ५५ मन्त्र

ये १०८ मन्त्र भक्ति योग से भरपूर हैं | अभी तक मैं 3 मन्त्र गीत स्तुति के प्रस्तुत कर चुका हूं | आशा है आप सब को बहुत आनन्द प्राप्त होगा |

राजेन्द्र आर्य‌