पिता के बाद माँ

पिता के बाद माँ :

पिता के बाद माँ
बदल सी गई है
सबके सामने नहीं करती वह
पिता को याद

अकेले में चुपके से पोंछती है आँख
पिता की तस्वीर पर रखकर हाथ
कुछ कहती है मन ही मन
भीड़ या बाज़ार में
जब जाती है बेटे के संग
तो नहीं छोड़ना चाहती अँगुली
मंदिर जाने पर उसे प्रसाद ज़रूर दिलाती है

हमें रोने नहीं देती कभी
समझाती है यह कहकर
ये तो होता ही है जीवन में

मुझे उस दोस्त का
यह कहना अच्छा लगा
कि तुम्हारे पास अभी
माँ तो है ।

मेरे पूज्य पिता श्री मोती राम जी का निधन 8 सितम्बर 2011 को प्रात: 6 बजे उत्तम नगर, न‍ई दिल्ली में 88 वर्ष की आयु में हो गया है अत: यह कविता मैने श्रद्धाञ्जली स्वरूप लिखी है मेरी माताजी श्रीमती आशा देवी जी
85 वर्ष की हैं अत: मेरी माँ तो है जो सदा हमें आशीष देती है |

राजेन्द्र आर्य
सुपुत्र स्व.श्री मोती राम
ई 84 उत्तम नगर, आर्य समाज रोड,
न‍ई दिल्ली 110059

अच्छी

अच्छी कविता हैँ।

वास्तव में

वास्तव में अति भावपूर्ण कविता है, जीवन को अभिव्यक्ति देती हुई !

आनन्द‌

हे मेरे

हे मेरे प्रभु मुझे मेरी माँ का प्यार सदा प्राप्त होता रहे:

ओ३म् प्रियं मा कृणु देवेषु प्रियं राजसु मा कृणु |
प्रियं सर्वस्य पश्यत उत शूद्र उतार्ये ||
अथर्ववेद १६|६२|१ ||

हे प्रभुवर ऐसी कृपा करो, ज्ञानी जन मुझ को प्यार करें |
मेरा प्रशस्य कर्त्तव्य देख, शासक गण भी सत्कार करें ||
मैं जन प्रिय ऐसा बन जाऊँ, सभी प्यार से मुझको देखें |
व्यापारी सेवक सहकारी, जब देखें तब प्रिय ही देखें ||

माँ को प्रणाम,

राजेन्द्र आर्य, संगरूर (पंजाब)
9041342483

हे मेरे

हे मेरे प्रभु मुझे मेरी माँ का प्यार सदा प्राप्त होता रहे:

ओ३म् प्रियं मा कृणु देवेषु प्रियं राजसु मा कृणु |
प्रियं सर्वस्य पश्यत उत शूद्र उतार्ये ||
अथर्ववेद १६|६२|१ ||

हे प्रभुवर ऐसी कृपा करो, ज्ञानी जन मुझ को प्यार करें |
मेरा प्रशस्य कर्त्तव्य देख, शासक गण भी सत्कार करें ||
मैं जन प्रिय ऐसा बन जाऊँ, सभी प्यार से मुझको देखें |
व्यापारी सेवक सहकारी, जब देखें तब प्रिय ही देखें ||

माँ को प्रणाम,

राजेन्द्र आर्य, संगरूर (पंजाब)
9041342483

ओ३म्

ओ३म् अनुव्रत: पितु: पुत्रो मात्रा भवतु संमना: |
जाया पत्ये मधुमती वाचं वदतु शन्तिवाम् ||
अथर्ववेद ३|१०|२ ||

हो पुत्र पिता से उदगामी, उनके व्रत के अनुगामी हों |
माता के मन में बस जायें, अनुशासित हों सहगामी हों ||
पत्नी अपने पति से बोले, सदा सुहानी मिठी वाणी |
शुभ शान्ति हृदय को मिलती हो, हो वाणी उसकी कल्याणी ||

माँ तुझे प्रणाम,

राजेन्द्र आर्य, संगरूर (पंजाब)
9041342483