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AryasamajOnline |
पिता के बाद माँपिता के बाद माँ : पिता के बाद माँ अकेले में चुपके से पोंछती है आँख हमें रोने नहीं देती कभी मुझे उस दोस्त का मेरे पूज्य पिता श्री मोती राम जी का निधन 8 सितम्बर 2011 को प्रात: 6 बजे उत्तम नगर, नई दिल्ली में 88 वर्ष की आयु में हो गया है अत: यह कविता मैने श्रद्धाञ्जली स्वरूप लिखी है मेरी माताजी श्रीमती आशा देवी जी राजेन्द्र आर्य
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अच्छी
अच्छी कविता हैँ।
वास्तव में
वास्तव में अति भावपूर्ण कविता है, जीवन को अभिव्यक्ति देती हुई !
आनन्द
हे मेरे
हे मेरे प्रभु मुझे मेरी माँ का प्यार सदा प्राप्त होता रहे:
ओ३म् प्रियं मा कृणु देवेषु प्रियं राजसु मा कृणु |
प्रियं सर्वस्य पश्यत उत शूद्र उतार्ये ||अथर्ववेद १६|६२|१ ||
हे प्रभुवर ऐसी कृपा करो, ज्ञानी जन मुझ को प्यार करें |
मेरा प्रशस्य कर्त्तव्य देख, शासक गण भी सत्कार करें ||
मैं जन प्रिय ऐसा बन जाऊँ, सभी प्यार से मुझको देखें |
व्यापारी सेवक सहकारी, जब देखें तब प्रिय ही देखें ||
माँ को प्रणाम,
राजेन्द्र आर्य, संगरूर (पंजाब)
9041342483
हे मेरे
हे मेरे प्रभु मुझे मेरी माँ का प्यार सदा प्राप्त होता रहे:
ओ३म् प्रियं मा कृणु देवेषु प्रियं राजसु मा कृणु |
प्रियं सर्वस्य पश्यत उत शूद्र उतार्ये ||अथर्ववेद १६|६२|१ ||
हे प्रभुवर ऐसी कृपा करो, ज्ञानी जन मुझ को प्यार करें |
मेरा प्रशस्य कर्त्तव्य देख, शासक गण भी सत्कार करें ||
मैं जन प्रिय ऐसा बन जाऊँ, सभी प्यार से मुझको देखें |
व्यापारी सेवक सहकारी, जब देखें तब प्रिय ही देखें ||
माँ को प्रणाम,
राजेन्द्र आर्य, संगरूर (पंजाब)
9041342483
ओ३म्
ओ३म् अनुव्रत: पितु: पुत्रो मात्रा भवतु संमना: |
जाया पत्ये मधुमती वाचं वदतु शन्तिवाम् ||अथर्ववेद ३|१०|२ ||
हो पुत्र पिता से उदगामी, उनके व्रत के अनुगामी हों |
माता के मन में बस जायें, अनुशासित हों सहगामी हों ||
पत्नी अपने पति से बोले, सदा सुहानी मिठी वाणी |
शुभ शान्ति हृदय को मिलती हो, हो वाणी उसकी कल्याणी ||
माँ तुझे प्रणाम,
राजेन्द्र आर्य, संगरूर (पंजाब)
9041342483