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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

सामवन्दना : पवित्र पाञ्चजन्य‌

ओ३म् अग्निर्ऋषि पवमान: पाञ्चजन्य: पुरोहित: ।
तमीमहे महागयम् ।।साम १५१९।।

ओ३म् प्राण प्रिय दु:ख विमोचक, हे सुखदायक उत्थान करो ।
करो हमारा जीवन पावन, हे ओ३म् सदा कल्याण करो ।।

जैसे अग्नि प्रकाशन करता,
पल पल पन्थ प्रदर्शन करता,
अपने तेज ताप के द्वारा
तीक्ष्ण तरल सब पावन करता ।

वैसे ही प्रभु प्रभ ज्ञान दो, जीवन पवित्र पवमान करो ।
करो हमारा जीवन पावन, हे ओ३म् सदा कल्याण करो ।।

नहीं अकेले पञ्च जनों का,
चार वर्ण के आर्यजनों का,
उनका भी हो जीवन पावन
बचे पांचवें पतित जनों का ।

एक अकेले से क्या होगा, प्रभु सबको ही सुख दान करो ।
करो हमारा जीवन पावन, हे ओ३म् सदा कल्याण करो ।।

सृष्टिपूर्व से तुम्हीं पुरोहित,
ले चले आ रहे सबका हित,
यह गायक आ गया आज जो
लेकर आहुति दो उसे सुहित ।

महा गान यह मिलकर गाया, प्रभु सफल सकल गुण गान करो ।
करो हमारा जीवन पावन, हे ओ३म् सदा कल्याण करो ।।

राजेन्द्र आर्य
संगरूर
9041342483