Skip navigation.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

आर्यसमाज व महर्षि दयानन्द‌

कौन बनेगा करोड़पति मे प्रश्न पूछा गया कि महर्षि दयानन्द ने किस की ओर वापस लोटो कहा था जिसके चार ओपशन थे 1. शास्त्र 2. गीता 3. पुराण 4. वेदों

उत्तर देने वाले ने कहा कि दयानन्द का नाम तो सुना है परन्तु जानकारी नहीं है उत्तर दिया गीता की ओर वापस लोटो
अत: आर्यसमाज‌ और महर्षि दयानन्द के बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है यह सब आर्यसमाज की शिथिलता का ही परिणाम है आज पदयुग है सोचना पड़ेगा | आर्यसमाज अपने सिद्धान्तों से भटक रहा है | मैंने जिला संगरूर की सभी आर्यसमाज का आकलन किया है जिनमें पौराणिक विचारधारा के प्रधान, मन्त्री, अन्य पदाधिकारी बन रहे हैं जिसे देख कर मन अशान्त हो जाता है | वर्तमान कम्प्यूटर तकनीक का युग है, इससे प्रचार हो भी रहा है और हमें इस और ध्यान देना होगा, बढ़ावा देना होगा सभी सहयोग करें.....

सोचिये जरा......

राजेन्द्र आर्य
संगरूर‌

अपने एक

अपने एक बहुत बड़ी समस्या की ओर इशारा किया है.इसके लिए मैं आपका धन्यवाद करना चाहता हूँ.आर्य समाज की स्थापना कुरीतियों को ख़त्म करने के लिए की गई थी पर आज कुछ आर्य समाज के लोग और उनके परिवार कुरीतियों से भरे पड़े हैं.सिर्फ पैसे से आकलन करके अंधे और बहरे लोग उनको प्रधान और मंत्री बना देते हैं.ऐसे लोग और उनकी आर्य समाज ज्यादा दिन तक जिन्दा नही रहती हैं.अनार्य विचारधारा के लोगो ने आर्य समाजों पर कब्जा किया हुआ है.आर्य समाज तो क्या ये लोग तो सभाओं में भी कब्ज़ा किये बैठे हैं.जरुरत है इनको पहचान कर इनको आर्य समाज की सरहद से बाहर करने की.तभी आर्य समाज बचेगा अन्यथा नहीं.रविन्द्र आर्य

मान्य

मान्य आर्यवर रविन्द्र आर्य जी, नमस्ते ।

आपका बहुत धन्यवाद, आपने बिल्कुल सही कहा है । ये लोग स्कूलों की ओर अधिक ध्यान देते हैं, आर्यसमाज की इन्हें को‍ई चिन्ता नहीं है । आपको बड़ी हैरानी होगी, संगरूर के पास धुरी की आर्यसमाज है जिन्होंने क्रिस्मस डे धूमधाम से मनाया और समाचार पत्र में सूचना भी छपवा‍ई जिसकी मैँने पंजब आर्य प्रतिनिधि सभा, जालन्धर में इन पर कार्यवाही करने को लिखा क्योंकि यह आर्य समाज सभा के अधीन है, परन्तु उन्होंने को‍ई उत्तर नहीं दिया । फिर मंने दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा को लिखा उन्होंने इनसे सफा‍ई मांगी परन्तु इन्होंने गोलमाल जवाब दे दिया और क्षमा मांग ली । मेरे पास प्रतिलिपी सुरक्षित है । बस और क्या कहूं, मन अशान्त हो उटता है ।
आर्य बन्धु संघर्ष करते हैं उन्हें भी दबा दिया जाता है ।

राजेन्द्र आर्य
संगरूर‌

मै तो कहता

मै तो कहता हू कि इन नासमझ अनार्यो को एक बहुत बडा सबका सिखाया जाय.इन लोगो ने तो काङ्रेस की नीती अपना ली है.काम करा रहे है विदेशियो का और बैठे है देश मे.आर्यसमाज् जैसे सङठन को इस प्रकार से अपने पथ से भटकाने वाले के साथ ऐसा करना चाहिये जिससे वे और उनके परिवार के सभी सदस्य नीन्द न ले सके.(मेरे विचार मे तो उन्हे जेल मे भी डाल देना चाहिये).

यह आर्य

यह आर्य समाज नही:
आप सब विद्वत् गणो को पता तो होगा ही कि आर्यसमाज का मतलब होता है श्रेष्ठो का समूह.किन्तु आज के तथाकथित् आर्यसमाज मै गन्दे लोग है तो मै उसे आर्य समाज् नही कह सकता हू.मै तो अब भी यह विश्वास रखता हू कि आर्यसमाज् से महान् और कुछ भी नही हो सकता है.

आज के आर्यसमाज् के सदस्य:
मै मेरे ही किसी दोस्त के बारे मे लिख रहा हू.मेरा एक दोस्त है जो कि अपने आपको आर्यसमाजी कहते है.किन्तु उसके पिता रोज शाम को शराब पीते है.और वह मेरे दोस्त ,जो की अभी किशोर है, लडकियो के पीछे भागते फीरते है.वह कभी भी हवन नही करते है.जहा पर मूर्तिपूजा होती है वहा जाते है.

किसी एक और आर्यसमाजी के बारे मे लिखता हू.जो वह परिवार है वह अङ्रेजी विचारधारा मे फसा हुआ है.उस परिवार की लडकिया जिन्स पेन्ट जैसे कपडे पहनते है.हवन नही करते है.

आज के तथाकथित आर्यसमाजी वे सब बुरे कर्म करते है जो कि नही करने चाहिये.

हाल में

हाल में मैं आर्यसमाज कालका जी गया था | कोई 70 साल से कम का था ही नहीं | लोग अपने बचो को लेकर मंदिरों में जा सकते है | मेलो में जा सकते है तो आर्य समाज क्यूँ नहीं ला सकते ?

Always accept the truth and

Always accept the truth and decline the false
मै असली आर्यसमाज के नियम स्पष्ट कह देता हू.जितनी अधिक spiritual knowledge की बच्चो को जरूरत है उतनी किसी को भी नही है.क्योकि महर्षि दयानन्द ने साफ लिख रक्खा है कि जो माता पिता अपने सन्तानो को पढाते नही वे दुष्ट होते है.आज का आर्यसमाज यदि बच्चो को नही आने देता है तो जो आर्यसमाज के पदो पर आसीन लोग है उनको जान से मार देना चाहिये.क्योकि बच्चो को ज्यान न देकर उन लोगो ने पूरे विश्व का विनाश कर दिया है.

ऐसा ही

ऐसा ही चलता रहा तो आर्यसमाज और कितने दिन तक टिक पायेगा | मेरे एक मित्र का कहना है की आर्यसमाज अप्पोला मैं उसे शाम को यज्ञ करने से रोक दिया गया और कहा गया की आर्यसमाज में शाम को यज्ञ करने का कोई नियम नहीं है |अब यज्ञ आर्यसमाज में नहीं होंगे तो क्या church में होंगे |

Always accept the truth and

Always accept the truth and decline the false
हम सब यह जानते है कि आर्यो का परम धर्म हमेश सुबह शाम यज्य करना है.फिर भला शाम को यज्य क्यो न किया जाय?मैने किसी समय आर्यसमाज का कडवा सच इस् वेबसाईट पर डालकर कहा कि आर्यसमाज मूर्ख है तो वह लेख हटा दिया गया.अब आप लोगो के ये लेख है जो कि नही हटाये जा रहे है.वैसे आर्य समाज अब अनार्यसमाज बन गया है.जैसा कि आप सब जानते है ये तथाकथित आर्यसमाजी शराब,गुटखा आदि का सेवन कर‌ते है और आर्यसमाज के नियमो का अनुसरण नही करते है.

मै एक नया खुलासा यहा पर करना चाहता हू कि प्रत्येक गाव मे एक आर्यसमाज था.कई गावो के आर्यसमाज को तोडकर वहा पर घर बनाकर लोग‌ रहने लगे है.आर्यसमाजी नई देल्ली को तोडा गया.लेकिन अभी भी सोते रहो रहो सोते रहो.

मेरे लाडनू के आर्यसमाज को ही ले लो.अब वहा पर ऐसे ऐसे लोग आते है प्रवचन देने के लिये कि भाङ मान्स आदि का सेवन करने से रोग ठीक हो जाते है.और दो अक्तुबर को एक ऐसा ही कोई कार्यक्रम होने वाला है.वो आर्यसमाज जो कि गलत मतो का खन्डन करने के लिये जाना जाता था वही यदि ऐसे ऐसे उपदेशको को बुलावे तो क्या वह आर्यसमाज कहलावेगा??

आज के आर्यसमाज के सन्यासि विश्वास रखते है कि योग से व्यक्ति हज्जारो फुट लम्बा हो जाता है.हुहुहुहु.लगता है महर्षि दयानन्द को वापस बुलाना पडेगा।जब उन साधुओ से प्रमाण पूछा जाता है कि तुम उतना बडा बनकर दिखाओ तो मौन व्रत धारण कर लेते है.अरे।।।।सबसे बढिया example तो देना भूल ही गया।हमारे सबसे बडे विद्वान् ब्रह्मर्षि महर्षि अग्निवेशजी का.उनका तो क्या कहना।

अब आप मेरे तर्को का बुरा मत मानना.स्वमी सत्यपतिजी अभी मात्र 64 वर्ष के हुए है.और वे एक सन्यासि है.सन्यासि यानि ब्रह्मचारी.लेकिन उनकी हालत् तो ऐसी हुई है कि मानो ब्रह्मचर्य उन्होने रक्ख ही न हो.फिर आप मुझसे प्रश्न करो कि क्या उस उम्र मे यह हालत नही हो सकती है?तो उत्तर है आचार्य नरेश.वे स्वामी सत्यपतिजी से उम्र मे बहुत बडे है लेकिन अभी भी वे जवान् है.स्वामी सत्यपतिजी शब्द को शबद बोलने लगे है.उनका उच्चरण भी गडबडा गया है.उनसे शुद्ध उच्चारण तो 85 वर्ष का बुड्ढा भी कर सकता है.क्ऋपया बुरा न माने.सुना है कि ब्रह्मचर्य से व्यक्ति 400 वर्ष तक रह सकता है.लेकिन क्या कोई ऐसा आर्य सन्यासि हुआ को कि 400 वर्ष तक रह पाया सिवाय द्यानन्द,श्रद्धानन्दजी के.क्योकि उन दोनो को मारा गया था.यानि कोई भी आर्यसन्यासि ब्रह्मचर्य व्रत का पालन नही करता है.

विनती करता हू बुरा न माने.