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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

आर्य समाज कि वेबसाइट पर अद्वैतवाद का प्रतिपादन !! कृपया इसका विरोध करें ||

http://aryasamajjhansi.blogspot.com/2011/09/blog-post.html

ईश्वर ही तुम्हारे रूप में विद्यमान हैं

-----------------यह ज्ञान कि आप आत्मा हो जो ईश्वर से भिन्न नहीं है। यह न देख पाना ही सबसे बड़ा पाप है कि स्वयं ईश्वर ने ही इस संसार एवं आपका रूप धारण किया है। सत्य तो यह है कि छोटी से छोटी चीज भी ईश्वर की ही अभिव्यक्ति है। किन्तु आप यह नहीं समझ पाते कि वह ईश्वर हैं और यही आपकी गलती है।
वास्तव में असीम ईश्वर ने ही सीमित रूप धारण किया हुआ है। वह एक रूप धारण क्यों नहीं कर सकते? वह सबकुछ हैं। यदि आप फूलों और रत्नों के मूलतत्व को एवं सृष्टि के सभी रूपों को- आपको मिलाकर- देख सकें तो आप पायेंगे कि वे सब और स्वयं आप ईश्वर के ही बने हैं--------------

http://aryasamajjhansi.blogspot.com/2011/09/blog-post.html

ये सब आर्य समाज झाँसी कि वेबसाइट पर लिखा है !!
कृपया इसपर कमेन्ट करें और उनको इन्हें बदलने अथवा स्पष्ट करने के लिए कहें |
http://aryasamajjhansi.blogspot.com/2011/09/blog-post.html

मैंने उसपर कमेन्ट कर दिया है |

धन्यवाद|

Always accept the truth and

Always accept the truth and decline the false
बडे ही दु:ख की बात है आर्यसमाज अब क्या क्या दोष अपने साफ सुथरे मूह पर लगायेगा।यदि आर्यसमाज की ही वेबसाईट पर अनार्य लोगो द्वारा रचित पुस्तको की बाते लिखी जाने लगेगी तो सत्य का प्रचार व प्रसार कौन करेगा?यह बडा गम्भीर विषय है.हमे आर्य प्रतिनिधि सभा को कहना चाहिये कि आप अपने नाम से जितनी भी वेबसाइट और पुस्तके है उन सब को देखकर उनमे आवश्यक बदलाव करे.

श्री कृष्ण

श्री कृष्ण आर्य जी नमस्ते |

आपने अच्छा किया | आर्यसमाज झान्सी के पदाधिकारी लगता है आर्यसमाज के सिद्धान्तों से अनभिज्ञ हैं इनको पाखण्ड ने जकड़ रक्खा है | पता लगाना होगा कि पदाधिकारी कौन लोग हैं | लेख का लेखक कौन है उसका पूरा परिचय बतायें | धन्यवाद |

राजेन्द्र आर्य
संगरूर
email: rajenderarya49@gmail.com

Mobile : 090413 42483

Do not have hindi font,

Do not have hindi font, please pardon for using English language.
One potent way to end or limit the misuse of anti-vedic literature in organizations which either use the name aryasamaj or use the name of Swami Dayanand Saraswati is to take legal action. This legal action should be well planned. My suggestion is, we can argue in the court of law that Swami Dayanand Saraswati gave the call of back to the vedas. Swamiji proclaimed vedas are the eternal truth and it is in the 4 vedas that truth has been expounded by god (om). He (Swamiji) propounded anything that is against the vedas is unacceptable, is false and to be corrected. Swamiji believed there are some valuable literature like certain upanishads, gita, Valmiki Ramayan, and other works by Rishi Patanjali, Rishi Yagyavalkya, etc that interpret vedas or have the same principles as the 4 vedas. Swamijis seminal work is Satyarth Prakash and his ideology, principles , views can be understood from this book (Master piece ).
Now after around 125+ years of him leaving body if some organizations use his name or use the name of aryasamaj , which was a organization started by him, for propogating anti-vedic, anti-satyarth prakash, anti-dayanand views , they should be barred . Barred from using his name or photo for any meeting,organizations, magazine,journal, collection of fund or representing arya samaj.
This can be done by clearly bringing out the main points of satyarth prakash. Those points could be :
1.Swamiji proclaimed god does not take incarnation
2.No to ideal worship
3.God, prakriti and soul are not created by anyone, they are swambhu.
4.God and soul are different. Denial of advaita theory.
5.Havan is one of the most important karma.
6.Soul takes re-birth as per its karmas and ultimate objective is mokshya.
etc
Any person\organization not adhering to these and others is not a aryasamaji . This can be taken up in court and if the court is convinced than a lot of problem can be solved. This a legal route and legal experts should be consulted on this issue.
Social measures like criticizing , condemnation, boycott has not work. A perfect and crude example of the failure of real arya samajis is the presence of Mr Agnivesh, who is the face of arya samaj in India and abroad.

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it seems that page has been removed now!
-------------aum----------

मैंने

मैंने आर्यसमाज झान्सी के ईमेल पर लेखक की जानकारी मांगी थी उन्होंने मुझे ईमेल क उत्तर दिया है के लेख मिटा दिया है किसी अनजान का लेख था इसके लिये उन्ह्ंने खेद व्यक्त करते हुए क्षमा भी मांग ली है और आर्यत्व का परिचय दिया है और आगे से ध्यान रखने का वचन दिया है |ये उनकी सज्जनता है, मैंने ईमेल् पर उत्तर में धन्य्वाद किया है |

कृष्ण आर्य जी के परिश्रम से आर्य सिद्धान्तों की रक्षा हो ग‍ई है, धन्यवाद |

शुभेच्छु:

राजेन्द्र आर्य
संगरूर‌

Always accept the truth and

Always accept the truth and decline the false
अत: हमे किसी की भी बात को बिना परीक्षण किये नही स्वीकारना चाहिये.शायद आर्यसमाज झान्सी वालो ने यह गलती कर दी थी.

मुझे इसका

मुझे इसका पता aryasamajonline http://groups.yahoo.com/group/aryasamajonline/message/18949

से चला था| ये अच्छी बात है है इसका निराकरण जल्दी से हो गया |

please remove all of above

please remove all of above thanks

thats great.... aap logo ki

thats great.... aap logo ki sahayata se kuchh dosh door ho rahe hain... hum sab ko galat chijo ke prati sachet rahkar unhe sudharna chahiye

hridya se dhhanyawad