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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

ऋषि-कृषि की वैदिक परिकल्पना साकारलोकेश प्रताप सिंह

ऋषि-कृषि की वैदिक परिकल्पना साकार लोकेश प्रताप सिंह, कानपुर (दैनिक जागरण से साभार‌)
सूर्य की पहली किरण के साथ ही उस बाग में अग्नये स्वाहा, अग्नये इदन्मम व प्रजापतये स्वाहा, प्रजापतये इदन्मम का मंत्रोच्चारण हुआ और आहुति डाल दी गई। नित्य हवन की यह प्रक्रिया वातावरण शुद्ध करने की कामना से ही नहीं, फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए भी की जाती है। ऋषि-कृषि की यह वैदिक कल्पना चरितार्थ हुई है उन्नाव से 35 किमी दूर गौसपुर निटर्रा गांव में। यह सफल प्रयोग तीन साल से जारी है। महेश्वर (मप्र) के वसंत परांजपे की देखरेख में अग्निहोत्र कृषि पर पोलैंड, आस्टि्रया, जर्मनी, पेरू, चिली व अर्जेटीना में भी प्रयोग चल रहे हैं। उन्नाव के रमेश तिवारी ने भी अपने 12 एकड़ में फैले आम के बाग में यह प्रयोग किया। बाग में दशहरी, चौसा, लंगड़ा, तोतापरी प्रजाति के पेड़ हैं। उर्वरक एवं रासायनिक कीटनाशकों के लगातार प्रयोग के कारण आम का आकार, स्वाद और उत्पादन जब काफी प्रभावित होने लगा, तो केंद्रीय उपोष्ण व बागवानी संस्थान, लखनऊ की सलाह पर उन्होंने अग्निहोत्र विधि शुरू की। बाग के बीच में एक कुटी बनाकर वहां ताम्र पिरामिड स्थापित कर हवन स्थल बना। गाय के गोबर से तैयार उपले को जलाकर सूर्योदय व सूर्यास्त के वक्त अक्षत व गाय के घी के साथ मंत्रोच्चार के बीच नियमित आहुतियां डाली जाने लगीं। प्रयोग के पहले वर्ष में ही असर दिखने लगा। आम की फसल पर न केवल खूब बौर आए बल्कि कीटों का प्रकोप भी थमा। जो वृक्ष सूखने लगे थे, उनमें भी कोपलें फूटीं। रमेश तिवारी बताते हैं कि बीते तीन वर्षो में आम उत्पादन तीन गुना तक बढ़ा। देव संस्कृति विवि व राष्ट्रीय बागवानी मिशन के विशेषज्ञ प्रयोग से जुड़ गए हैं। यह प्रयोग देखने के लिए अमेरिका, आस्टि्रया, पेरू, जर्मनी, पोलैंड आदि से विशेषज्ञ आने लगे हैं। उन्नाव में हसनगंज ब्लाक, असेमा के कमलेश सिंह ने आम के बाग व आलू के खेत में यही प्रयोग शुरू किया, तो उन्हें भी बिना किसी उवर्रक का प्रयोग किए तीन गुना से अधिक उत्पादन मिला। फिर तो अमोइया के हरिनाथ सिंह, मुजफ्फरनगर के रामकुमार अवस्थी समेत दर्जनों किसानों ने भी अग्निहोत्र कृषि शुरू की तो आलू, बरसीम, राजमा के उत्पादन में पांच गुना वृद्धि हुई। इस विधि में पानी में हवन की राख का घोल बनाकर उसका फसल या पेड़ पर छिड़काव करते हैं।