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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

साम श्रद्धा : सुखमय‌ वातावरण (प्रणेता: पं. देवनारायण भारद्वाज )

ओ३म् वात आ वातु भेषजं शंभु मयोभु नो हृदे ।
प्र न आयूषि तारिषत् । ।।साम १८४ ।।

ईश्वर ऐसी वायु बहाओ ।
सुखमय वातावरण बनाओ ।।

यज्ञ सुरभि को लाने वाली ।
वायु स्वयं हो भेषज आली ।
श्वांस श्वांस हो उठे प्रफुल्लित,
स्वस्थ वायु सुख हृदय जगाओ ।।

यह वायु रोग सब हरती हो ।
संसार मुदित यह करती हो ।
सुगम पार पहुँचाने वाली,
आयु किनारे वायु लगाओ ।।

जो इसे प्रदूषित करता है ।
ले वंश स्वयं ही मरता है ।
अपनी प्राणाधार वायु को,
मनुज स्वयं तुम शुद्ध बनाओ ।।

राजेन्द्र आर्य
संगरूर
090413 42483