Skip navigation.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

साम- श्रद्धा : प्रभु तुम्हें नमन (प्रणेता: पं. देवनारायण भारद्वाज)

ओ३म् उप त्वाग्ने दिवे दिवे दोषावस्तर्धिया वयम् ।
नमो भरन्त एमसि । ।।साम १४ ।।

प्रभु तुम्हें नमन प्रभु तुम्हें नमन ।
मेरे प्यारे प्रभु तुम्हें नमन ।।

मैंने इस दुनिया को देखा ।
देखा जड चेतन का लेखा ।
देखी प्रभु की सर्वत्र देन,
तन मन धन बुद्धि और जीवन ।।

तुम्हें तुम्हारा अर्पण कैसा ।
अपने पास नहीं कुछ ऐसा ।
एक नमन ही अपना ठहरा,
प्रभु तुम्हें समर्पित यही नमन ।।

दिन रात नित्य सन्ध्या प्रभात ।
मन में मँडराती यही बात ।
हर समय नाथ का साथ रहे,
यह माथ नमन में रहे मगन ।।

राजेन्द्र आर्य
संगरूर
9041342483