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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

साम वन्दना : स्तुतियों में रम जाओ

स्तुतियों में रम जाओ:

ओ3म् अग्न आ याहि वीतये ग्रृणानो हव्य दातये |
नि होता सत्सि बर्हिषि || साम 1 ||

प्रभु हे ज्योतिरूप। मेरे अन्तर मे दिव्य ज्योति फैलाओ |
कर्मयोग के तत्व लखा कर नर तन सफल कराओ ||

प्रभु मेरे प्यारे आ जाओ, गीत स्तुतियों में रम जाओ |
यह ह्रृदय तुम्हारा मन्दिर है, प्रभु इसमें आकर बस जाओ ||

प्रभु गीत स्तुति श्रवण करो,
यह सफल सुजीवन हवन करो,
मेरी दु:ख पीडा हरने को
हे ईश्वर तुम आगमन करो |

हर हव्य भोग के दाता हो, निज हव्य हमें भी दे जाओ |
यह ह्रदय तुम्हारा मन्दिर है, प्रभु इसमें आकर बस जाओ||

प्रभु वसुधा के ओर छोर से,
इस जीवन के सभी ओर से,
प्रभु आओ संताप मिटाओ,
अपनी सुखदा कृपा को से |

हो भक्ति मगन वन्दना करूं, प्रार्थना दया कर सुन जाओ|
यह ह्रदय तुम्हारा मन्दिर है, प्रभु इसमें आकर बस जाओ||

प्रभु तुम्हीं हमारे होता हो,
कामना पूर्ति के स्त्रोता हो,
मम ह्रदय यज्ञ का कुन्ड बना,
गीत तुम्हीं, तुम ही श्रोता हो|

मम ह्रदय यज्ञ का मन्दिर है, प्रभु आहुति लेकर रम जाओ|
यह ह्रदय तुम्हारा मन्दिर है, प्रभु इसमें आकर बस जाओ||

(पंडित देव नारायण भारद्वाज‌ रचित साम‌वन्दना से साभार)||

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