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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

वैदिक एकेश्वरवाद (Monotheism in the Vedas)

वैदिक एकेश्वरवाद (Monotheism in the Vedas)

तदेवाग्निस्तदादित्यस्तद्वायुस्तदु चन्द्रमाः ।
तदेव शुक्रं तद् ब्रह्म ता आपः स प्रजापतिः ॥
- यजुर्वेद ३२.१

(तत् एव अग्निः तत् आदित्यः तत् वायुः तत् उ चन्द्रमाः तत् एव शुक्रम् तद् ब्रह्म ताः आपः सः प्रजापतिः)

अर्थ - (तत्) वह एक मात्र परमेश्वर (एव) ही (अग्निः) तेजोरूप - ज्ञान-स्वरूप और सब से आगे पूजनीय होने से 'अग्नि' कहलाता है, (तत्) वही (आदित्यः) अखण्डनीय होने से 'आदित्य' कहलाता है, (तत्) वही (वायुः) जगद् का धारक और बलवान् होने से 'वायु' कहलाता है, (तत् उ) और वही (चन्द्रमाः) सुख-आनन्द देने से 'चन्द्रमा' कहलाता है, (तत् एव) वही (शुक्रम्) निष्कलंक, शुद्ध और स्वच्छ होने से 'शुक्र' (तद्) वही (ब्रह्म) महान् और ज्ञान का स्रोत होने से 'ब्रह्म' है, (ताः) वही (आपः) व्यापक होने से 'आपः' है, और (सः) वही (प्रजापतिः) प्रजा का पालक होने से 'प्रजापति' है ।

इन्द्रं मित्रं वरुणमग्निमाहुरथो दिव्यः स सुपर्णो गरुत्मान् ।
एकं सद् विप्रा बहुधा वदन्त्यग्निं यमं मातरिश्वानमाहुः ॥
- ऋग्वेद १.१६४.४६

(इन्द्रम् मित्रम् वरुणम् अग्निम् आहुः अथः दिव्यः स सुपर्णः गरुत्मान् एकम् सद् विप्राः बहुधा वदन्ति अग्निम् यमम् मातरिश्वानम् आहुः)

अर्थ - (अग्निम्) सब से आगे पूजनीय, तेजोमय अग्नि परमात्मा को ही 'इन्द्र', 'मित्र', 'वरुण' कहा जाता है । वही 'दिव्य', 'सुपर्ण' और 'गरुत्मान्' है । (एकम्) वह एक (सद्) है, किन्तु (विप्राः) विद्वान् लोग (बहुधा) बहुत से (वदन्ति) नामों से संबोधित करते हैं (अग्निम् यमम् मातरिश्वानम्) उसी का नाम 'अग्नि', 'यम' और 'मातरिश्वा' (आहुः) कहा जाता है ।

Purport: All these terms like Agni, Indra, Vayu etc are names of God. Therefore, the argument that the worship of different objects or beings (Polytheism) is found in the Vedas is completely wrong.

Just as one person is known by several appellations (names) due to the different functions he performs, and also due to the relations that exist between him and others, similarly God is also known by many names.

There are some people who believe that the Vedas teach that the Sun, the Moon etc. are objects to be worshiped. But such beliefs are wrong.

Bhavesh Merja

Thanks Bhaiji,,,for

Thanks Bhaiji,,,for enunciating this monotheistic mantras from Vedas!!!!
This is the "Updesh"/purpose of Arya Samaj, to educate our universal family and erase untruths of Hinduism.

Dhanyavaad!

वैदिक

वैदिक एकेश्वरवाद पर यजुर्वेद एवं ऋग्वेद मन्त्रों द्वारा बहुत सुन्दर विश्लेषण किया गया है साधुवाद ।

राजेन्द्र आर्य‌