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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

साम श्रद्धा : रमणीक जीवन‌

ओ३म् वसन्त इन्नु रन्त्यो ग्रीष्म इन्नु रन्त्य: । वर्षायण्नु शरदो हेमन्त: शिशिर इन्नुरन्त्य: । ।।साम ६१६ ।।

तन मन धन स्वस्थ सटीक करो ।
क्षण क्षण जीवन रमणीक करो ।।

फिर फिर मधुमय आये वसन्त ।
मुस्कायें सारे दिग दिगन्त ।
हरियाली की कोमल किसलय
गर्मी में पक्व प्रतीक करो ।।

वर्षा लाये सुभग सोम को ।
शरद बनाये शान्त व्योम को ।
हेमन्त सफलता दृढ़ता दे,
सम शिशिर विराग सटीक करो ।।

शैशव किशोर कौमार्य आयु ।
हो युवा प्रोढ़ या वृद्ध आयु ।
जीवन की सभी अवस्थायें,
प्रभु सफल सार्थक ठीक करो ।।

राजेन्द्र आर्य
चलभाष: 09041342483