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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

साम श्रद्धा : मेधा चमकाओ

ओ३म् उपह्वरे गिरीणां संगमे च नदीनाम् ।
धिया विप्रो अजायत् ।।साम १४३।।

आओ विप्रो आगे आओ ।
अपनी मेधा को चमकाओ ।।

उच्च दक्षता क्षमता लाओ ।
अपनी कमियां दूर भगाओ ।
बुद्धि चेतना विकसित करके,
जग में सुखद प्रकाश बढ़ाओ ।।

पर्वत की उत्तम ऊँचाई ।
सरिता संगम की अँगनाई ।
प्रभु प्रभा प्रकृति सौन्दर्य सुभग,
बैठ यहीं सौजन्य जगाओ ।।

यहीं ओम् का नाद उचरता ।
वेद गिरा का गान प्रसरता ।
भगवान यहीं वरदान यहीं,
विप्र यहीं तुम ध्यान लगाओ ।

राजेन्द्र आर्य
संगरूर
9041342483