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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

आर्यों का शिकवा जवाब शिकवा (महात्मा उत्तम चन्द शरर )

आर्यों का शिकवा भक्त का भगवान से प्रश्न:

तूही बतला तेरी धूम‌ मचाई किसने
कल्बे मुलहिद में तेरी, आग लगाई किसने
बुतकदों में शमा ए तौहीद जलाई किसने
चढ़ के मिंजर से ऋचा वेदों की गाई किसने
हम ही दीवाने अल्मस्त थे सौदाई थे

जवाब शिकवा : भगवान् का भक्त को उत्तर:

तुमने चाहा कि मिटे कुफ्र भी माया भी रहे
वेद प्रचार भी हो शोहरत ओ चर्चा भी रहे
गर बने तालिबे हक, तालिबे दुनिया भी रहे
वेद देखे भी नहीं वेद के शैदा भी रहे
लब से हक दिल से पर असनाम की चाहत ना ग‍ई
रिन्द के रिन्द रहे हाथ से जन्नत न ग‍ई |

प्रेषक :

राजेन्द्र आर्य
9041342483

आचार्य

आचार्य जी
उर्दू के कुछ शब्दों का खुलासा आपको करना होगा ताकि हम इस महान कविता का पुरा 2 लुत्फ ले सकें
बहुत 2 धन्यवाद

आनन्द‌

कल्बे =

कल्बे = घर
मुलहिद= नास्तिक
शमा ए तौहिद = एक होने की मशाल
मिम्बर : मस्जिद मंच
अलमस्त = मस्ताने
सौदाई = दीवाने

बहुत

बहुत सुन्दर प्रस्तुति, शररजी आर्यसमाज् की आन‍‍ बान शान थे.