यदि मृत्यु से डर लगता है तो समझना हम ईश्वर से दूर हो गये हैँ।क्योँकि अमरत्व प्रदान करने वाले अमृत रूपी परमात्मा की अमृतमयी गोद मेँ बैठने वाला कभी मृत्यु से नही डरता।अगर सोचते हो कि तुम मृत्यु से बच जाओगे तो तुम संसार मेँ मूर्खाधिराज हो।यदि फिर भी बचना चाहते हो तो एक उपाय मेरे पास है जानना चाहते हो तो नचिकेता बनकर जानो।
मृत्यु से बचाव

रवीन्द्र
रवीन्द्र जी नमस्ते;
आपने मृत्यु के डर के बारे में बताया है परन्तु मृत्यु से बचने का कोई उपाय नहीं बताया है। कृपया बचने के उपाय भी बताते तो हमारे पाठकवृन्द उससे लाभान्वित हो सकते हैं। मैंनं आपके अनेक ब्लॉग पढ़े हैं, ज्ञानवर्धक हैं। ईश्वर करे आप इसी प्रकार लेखनी के माध्यम से जनता की सेवा करते रहेंगे - इसी आशा के साथ --- वैदिक समाधान। God Bless You!
नमस्ते
नमस्ते मान्यवर!जातस्य हिः ध्रुवोः मत्युः ध्रुवं जन्म मृतस्य च।कृष्ण के इतना कहने पर अर्जुन ने भी यही प्रश्न किया जो आज आपने किया है।तो भगवान कृष्ण ने उपाय बताया कि बिना कारण कोई कार्य नही होता।यदि मृत्यु रूपी कार्य के कारण को समाप्त कर देँ तो मृत्यु से बचा जा सकता है।अर्जुन के कारण पूछने पर योगेश्वर श्री कृष्ण कहते हैँ कि जन्म ही मृत्यु का कारण है।यदि जन्म ही ना हो तो मृत्यु क्योँकर होगी।जन्म से बचने का तरीका आपको अगली बार बतायेँगे।आपकी जिज्ञासा देखकर अच्छा लगा मुझे।मेरे नंबर 919456493173 पर आप मुझसे वार्ता कर सकते हैं।आपसे बात करके मुझे खुशी होगी।नमस्ते

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