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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

साम श्रद्धा: सुभग सौम्यता (प्रणेता: पं. देवनारायण भारद्वाज)

ओ३म् स न: पवस्व शं गवे शं जनाय शमर्वते |
शं राजन्नोषधीभ्य: ||साम ६५३||

पशु मनुज अनुज उपयोगी हों |
सुख शान्त सभी सहयोगी हों ||

प्रभु हमको सोम सुरक्षा दो |
पावनता की शुभ शिक्षा दो |
जन जन में सुभग सौम्यता हो,
सब सब के पुण्य प्रयोगी हों ||

सब गौयें सुखी हमारी हों |
बल अश्व बृहत सुखधारी हों |
प्रिय वृक्ष वनस्पति औषधिया‍ण्,
सर्वोत्तम सदा निरोगी हों ||

ज्ञान इन्द्रियाँ गौयें प्यारी |
कर्म इन्द्रियाँ अश्व सुखारी |
तन मन को रखें सन्तुलित ये
प्रिय उन्नायक उद्दोगी हों ||

राजेन्द्र आर्य
संगरूर
9041342483