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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

साम श्रद्धा: दर्शन संगीत (प्रणेता: पं. देवनारायण भारद्वाज)

ओ३म् सखाय आ नि
सीदत पुनानाय प्र गायत |
शिशुं न यज्ञै: परिभूषत श्रिये ||साम ५६८||

धन्य भाग हैं आज हमारे |
सखा हमारे द्वार पधारे ||

पूरे होवें अरमान यहाँ |
गुञ्जित हो जायें गान यहाँ |
हम सबको बहुत सुहाते हैं,
प्रभु दर्शन संगीत तुम्हारे ||

प्रभु गीत पुनीत बनाते हैं |
आनन्द बढ़ाते जाते हैं ||
शिशुओं के जैसे अभिभावक,
वैसे ही हैं आप हमारे ||

शैशव संस्कार सजाता है |
वह श्री भुषित हो जाता है |
हमें सुशोभित श्रेष्ठ बनाते,
गीत तुम्हारे प्यारे प्यारे ||

राजेन्द्र आर्य
संगरूर
9041342483