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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

क्या आर्यजन कामचोर है या आर्य समाज दिशाभ्रमित हो गयी है ???विचार करें....

इस वेबसाइट के माध्यम से मैं सभी अर्याजानो से कुछ prashna करना चाहता हू .....आज आर्य समाज की स्थापना को १३० वर्ष से भी ज्यादा हो गए लेकिन क्यों आर्य समाज जिस तरक्की को हासिल शुरुरत में किया उसे आज खो दिया है???

संसार का उपकार करना इस समाज का मुख्या उद्देश्य है लेकिन आज किसका उपकार कर रहा है ???

कुछ लोग सिर्फ पद पाने के लिए आर्य समाज में आते है ,pradhan,mantri banna chahte है bas क्यों???
क्यों युवा वर्ग आर्य समाज को नहीं जनता??आर्य समाज से नहीं जुड़ना चाहता ???

बुजुर्ग vyakti आर्य समाज में aata है लेकिन वो भी अपने परिवार में से अपने bachche या kisi भी सदस्य को समाज में नहीं lata???kyo??प्रत्येक आर्य समाज के सदस्य अर्थात aryajan को pratidin yagya,sandhya करना chahiye, kitne karte है????

ved का padhna padhaana और sunna sunaana इस समाज का param dharma है ,क्यों लोग ved नहीं padhte व पालन करते ???

क्या यही सोच कर स्वामी जी ने आर्य समाज की स्थापना करी थी???

एक आगंतुक यदि आर्य समाज में आ जाये और कहे की रात को रुकने के लिए स्थान दे दीजिये तो आर्य समाज में उपस्थित व्यक्ति क्यों उसकी सहायता नहीं करता??

अगर कोई नया व्यक्ति आर्य समाज में आना चाहता है तो उसे वो स्थान नहीं मिलता जो मिलना चाहिए.....६-७ लोग आर्य समाज में निश्चित है वही प्रधान,मंत्री ,कोषाध्यक्ष बनते है किसी नए को स्थान ही नहीं दिया जाता ???क्यों??ऐसा लगता है कुछ बेवकूफ और जिद्दी लोगो ने आर्य समाज पर कब्ज़ा कर लिया है .....

दिल्ली में २०० से भी ज्यादा आर्य समाज है लेकिन २०० आर्य नहीं है???क्या ये गलत है???

मई आर्य समाज से पिछले १५ वर्षो से जुड़ा हु लेकिन आर्य समाज की दुर्दशा देख कर रोना आता है की इसी समाज की कल्पना करके स्वामी दयानंद जी ने इतना परिश्रम किया और अपने प्राणों का बलिदान दे दिया.....

आत्मदेव
(9311838451)

श्री

श्री आत्मदेवजी, नमस्ते |

आर्यसमाज की वर्तमान दशा के प्रति आपका आक्रोश सही है वैदिक सिद्धान्तों से अनभिज्ञ लोग पदाधिकारी बन गये हैं और क‍ई क‍ई वर्षों चुनाव नहीं करवाते, मैं संगरूर जिला की सभी आर्यसमाजों की गतिविधियां जानता हूँ आपको क्या बताऊँ एक आर्यसमाज तो क्रिस्मस डे पर्व मनाती है और जैन विद्वानों से प्रचार करवाती है और वो आर्यसमाज पंजाब आर्य प्रत्निधि सभा के अधीन है और सभा को शिकायत भेजने पर भी कोई कार्यवाही नहीं करती | आपकी तरह मैं भी बहुत आक्रोशित हूँ परन्तु कुछ बस नहीं चलता |

आर्य विद्वान ही कोई मार्गदर्शन कर सकते हैं |

धन्यवाद |

राजेन्द्र आर्य

आत्मदेव

आत्मदेव जी, नमस्ते
मै चौथी पीढी का आर्य समाजी हूँ,मेरी आयु ६३ वर्ष है, वर्तमान में मै सार्वदेशिक आर्यवीर दल का उप प्रधान संचालक हूँ.मुझे लगता है कि आप दिशा भ्रमित आर्य युवक है जिसे केवल कमजोरीयाँ नापने की आदत हो गयी है. आपकी जानकारी के लिए बताना चाहूँगा कि दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा का वर्तमान नेतृत्व युवा आर्य कर रहे है, आर्य केंद्रीय सभा देल्ली के महामंत्री और उनकी कार्यकारिणी के सभी सदस्य युवा है. ऐसे ही अधिकांश आर्य समाजो में भी युवाओं की संख्या बढती जा रही है परन्तु युवा अपने भविष्य की प्रगति और परिवार के भरण पोषण की जिम्मेदारी होने के कारण आर्य समाज के लिए अधिक समय नहीं दे पाते.दिल्ली की सभी आर्य समाजे मिलकर स्वामी श्रद्धानन्द बलिदान दिवस, महर्षि दयानंद जन्मोत्सव/निर्वाण दिवस, आर्य समाज स्थापना दिवस, फूलों और चन्दन से होली आदि के अनेक समारोह आयोजित करती है, यदि आप इन कार्यकर्मों में भाग लेते तो आप आर्य समाजीओं की संख्या को गिन नहीं पाते. क्या आपने १९९८ में दिल्ली के बुराड़ी में अंतर्राष्ट्रिय आर्यवीर दल महासम्मेलन अथवा रोहिणी में आयोजित अंतर्राष्ट्रिय आर्य महासम्मलेन देखा था. यदि आर्य समाजी कामचोर या आर्य समाज दिशा भ्रमित होते तो इतने बड़े आयोजन सम्भव न हो पाते. कृपया अपने सिमित दायरे से बाहर निकल कर दिल्ली पुलिस की सी.आई.डी. शाखा से इन आयोजनों की रिपोर्ट मालूम करके देखना ताकि आपको असत्य बातें लिखने की गलती का अनुमान हो सके.

आर्य समाज

आर्य समाज के वर्तमान और भविष्य की चिंता करने वाले सज्जनों से मैं केवल यही निवेदन करूंगा कि -

हमसे जो कुछ हो सकता है, वह हम निष्ठा पूर्वक, अपना कर्तव्य समझकर, आनन्द से करते रहें । दूसरें व्यक्ति को बदलना पर्याप्त कठिन कार्य है । अतः हम स्वयं को अनुशासित बना रखें और वैदिक धर्म का पालन करते हुए अन्यों को भी उससे प्रभावित करने का यथा सामर्थ्य पुरुषार्थ करते रहें ।

आर्य समाज के अधिकारियों में कुछ अच्छे हैं, निष्ठावाले हैं, विज्ञ हैं; और कुछ ठीक नहीं हैं, स्वार्थी हैं, पदलिप्सा से ग्रस्त हैं । आज के इस भौतिकवादी युग में नैतिकता, निःस्वार्थता, प्रामाणिकता, संयम, परोपकार, संनिष्ठा, सरलता-सहजता आदि का भारी ह्रास हो रहा है । अतः आर्य समाज भी इससे बच नहीं सकता ।

हम धर्मात्मा और न्यायकारियों के बल की उन्नति और उनसे प्रियाचरण करें; और अधर्मात्मा व अन्यायकारियों के बल की हानि और उनसे अप्रियाचरण करें । ऋषि दयानन्दजी का तो यही आदेश है ।

भावेश मेरजा

बहुत

बहुत अच्छा लिखा आपने. धन्यवाद.

jitne bhi uper questions

jitne bhi uper questions aaye hai un sabhi ka uttar, unka samadhan rastriya arya nirmatri sabha kar sakti hai agar koi jigyasu ho aur jaan na chahe to sampark kare :rastriya arya nirmatri sabha janpat south delhi upasnayog yaj smiti ghitorni.
jaise ki doctor ka beta doctor nahi hota,master ka beta master nahi hota isi prakar arya samaji ka beta arya samaj nahi hota apitu gun karam soubhav apnaye jaate hai.yogyeta k laksan bhin bhin hote hai....bhin bhin se tatpraya hai yatharth gyan..
sampark kare...931015374....9313087163

thanks

arya karambir bhadana