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AryasamajOnline |
साम श्रद्धा : मधुमय जीवन (प्रणेता: पं. देव नारायण भारद्वाज)ओ३म् अभि ते मधुना पयो$थर्वाणो अशिश्रयु: | वे अडिग ध्येय हों प्रत्याशी | कामना देव की करते हैं | ऐसी उत्तम दृढ़ता लाओ | मधु दुग्ध सात्विक भोजन हों | *************************** राजेन्द्र आर्य, संगरूर (पंजाब)
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अति सुन्दर
अति सुन्दर उपदेश ! हर वाक्य सटीक प्रेरणा दे रहा है |
बहुत 2 धन्यवाद |
आनन्द