साम- श्रद्धा : प्रभु के साथ (प्रणेता: पं. देव नारायण भारद्वाज )

ओ३म् यस्मिन्विश्वा अधि श्रियो रणन्ति सप्त संसद: |
इन्द्रं सुते हवा महे || साम ७२३ ||

जिसने प्रभु से प्रेम बढ़ाया |
प्रेय- श्रेय सब उसने पाया ||

रहा बुलाता दुनिया को ही |
रहा भटकता वही बटोही |
जिसने प्रभु को साथ बुलाया,
प्रभु के साथ जगत भी पाया ||

प्रभुवर की बड़ी महत्ता है |
प्रभु में रक्षित सब सत्ता है |
होता वही विभव अधिकारी,
जिसने ज्ञान गिरा को पाया ||

प्रभु की वाणी जो सुन पाता |
उसको गायन भी आ जाता |
स्वर छन्द सात ले वही साथ,
प्रभु के साथ स्वयं मुस्काया ||

राजेन्द्र आर्य, संगरूर (पंजाब)
9041342483