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साम- श्रद्धा : प्रभु के साथ (प्रणेता: पं. देव नारायण भारद्वाज ) ओ३म् यस्मिन्विश्वा अधि श्रियो रणन्ति सप्त संसद: | जिसने प्रभु से प्रेम बढ़ाया | रहा बुलाता दुनिया को ही | प्रभुवर की बड़ी महत्ता है | प्रभु की वाणी जो सुन पाता | राजेन्द्र आर्य, संगरूर (पंजाब)
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