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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

वेद नारायण (अथर्ववेद ५७|१९|२६|३) प्रणेता पं. देवनारायण भारद्वाज)

ओ३म् आयुषे त्वा वर्चसे त्वौजसे च बलाय च |
यथा हिरण्य तेजसा विभासासि जना अनु ||
अथर्व.19.26.3

ईश्वर शासक नायक प्यारे | प्रजा पुरुष गुण गाते सारे ||
सुदृढ़ आयु सुख जीवन देना | वर्च ओज उत्तम बल देना ||
अपना स्वर्णिम तेज प्रशंसित | करते रहना वीर प्रकाशित ||
जन प्रजा सुरक्षा पायेंगे | वे तुझको ही चमकायेंगे ||

राजेन्द्र आर्य, संगरूर (पंजाब)
9041342483