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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

साम- श्रद्धा : ज्ञाता और विधाता (प्रणेता: पं. देव नारायण भारद्वाज)

ओ३म् वेत्था हि वेधो अध्वन: पथश्च देवाञ्जसा |
अग्ने यज्ञेषु सुकृतो ||साम १४७६ ||

यज्ञ मार्ग पर हमें चलाओ |
प्रभुवर हमको राह दिखाओ ||

कहीं अजान दूर का पथ हो |
पथ समीप का अथवा रथ हो |
तुम्हें ज्ञात हैं सभी दिशायें,
हमको सुभग दिशा दिखलाओ ||

तुम ज्ञाता और विधाता हो |
सुन्दर जग के निर्माता हो |
तुम्हें ज्ञात है दशा हमारी,
दशा हमारी सुखद बनाओ ||

तुम्हीं जगत में यज्ञ रचाते |
शुभ कृत्यों के फूल खिलाते |
तुम्हें ज्ञात कृतित्व हमारा,
सहज सफलता सुमन खिलाओ ||

राजेन्द्र आर्य, संगरूर (पंजाब)
9041342483