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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

साम- श्रद्धा : जीवन का अभिनय‌ (प्रणेता: पं. देव नारायण भारद्वाज)

ओ३म् इन्द्र इन्नो महोनां दाता वाजानां नृतु: |
महाँ अभिझ‌वा यमत् |
साम ७१५

तुम झूमो गाओ नृत्य करो |
शुभ अभिनय जीवन कृत्य करो ||

शक्ति कहाँ से तुमने पाई |
प्रभु महिमा क्या पड़ी दिखाई ||
प्रभु ने दिया सहारा तुमको,
उससे जगमग साहित्य करो ||

प्रभु ने प्रकृति विहान दिया है |
वेदों का विज्ञान दिया है |
आदर्श पित्र पथ दर्शक लख,
तुम भूमि उदय आदित्य करो ||

लय ताल तनिक भी भंग न हो |
घुटने टिकने का दण्ड न हो |
अधिकार उधार मिला तुमको,
उपलब्ध नृत्य से सत्य करो ||

राजेन्द्र आर्य
362- ए, गुरुनानक पुरा,
सुनामी गेट, संगरूर- 148001 (पंजाब)

09041342483