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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

साम श्रद्धा : सारस्वत पुकार‌ (प्रणेता: पं. देव नारायण भारद्वाज)

सारस्वत पुकार ओ३म् जनीयन्तो न्वग्रव: पुत्रीयन्त: सुदानव: |
सरस्वन्तं हवामहे ||साम १४६० ||

हमें जगत ने खूब लुभाया |
अन्त तुम्हीं को प्यारा पाया ||

जग को हमने खूब सजाया |
स्वयं नहीं कुछ भी सज पाया |
जब से देखी झलक तुम्हारी,
साथ तुम्हारे सजने आया ||

पत्नी से पायी प्रीति घनी |
संतान भूमि की कीर्ति बनी |
कल्याण- दान- प्रभुगान किये,
अब हमें मिलन ने अकुलाया ||

सर्वज्ञ तुम्हीं अनुरग्य तुम्हीं |
हो तन- मानस से विज्ञ तुम्हीं |
नाथ सुनो अब टेर हमारी,
व्यग्र हृदय ने तुम्हें बुलाया ||

राजेन्द्र आर्य,
#362-A, Guru Nanak Pura,
Sunami Gate,
SANGRUR-148001 (Punjab)
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