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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

जीना तो नहीं भूल गए....??

जीना तो नहीं भूल गए....??
पहले हाई स्कूल अच्छे नम्बरों से पास करने के लिए
वो मरते रहे...
फिर कालेज पूरा करने के लिए डेट रहे ताकि
कमाना शुरू कर सके ...
फिर शादी के लिए बेचैन रहे
और फिर बच्चो के लिए,
फिर बच्चे बड़े होकर कुछ बन जायें
इस कोशिश में तपते रहे,
फिर एक दिन वो रिटायर हो गए काम से ,
और आज जिन्दगी से रिटायर हो रहे हैं...
क्योकि मौत दरवाजे पर दस्तक दे रही है .....
और अचानक उन्हें लग रहा है ,
जिन्दगी की भागमभाग में वो जीना भूल ही गए थे ,
कहीं आप तो वो नहीं .....??
आप अपने साथ ऐसा मत होने देना ,ऐ दोस्त
जमकर जीना और उल्लास से जीना .............
नहीं तो कहीं जिन्दगी निकल न जाये.........
पं ब्रह्मदेव वेदालंकार
(09350894633 )
Purohit,
Arya Samaj Mandir

yahi jivan ka satya hai

yahi jivan ka satya hai

विवाह

विवाह संस्कार से प्रभावित वर और अन्य सभी :
एक विवाह स्ंस्कार में वर पक्ष से पौराणिक और कन्या पक्ष से आर्य पन्डित दोनों विवाह स्ंस्कार करवाने लगे पौराणिक ने नवग्रह चित्रावली बना पूजन में सर्प की भी पूजा शुरु की तो कन्या ने उस पर अपनी उंगली रखकर
पूछा ये क्या है ये सर्प पूजा होनी है तो कन्या ने जोर से चीख कर कहा कि मेरी उंगली पर सर्प ने डस लिया है
पन्डित ने कहा डरो नहीं ये तो नकली है | कन्या ने कहा नकली की पूजा भी नकली ही होती है अत‍ह् आर्य पन्डित से असली विवाह स्ंस्कार सम्पन्न करवाओ| सभी प्रभावित हुवे और वर भी आर्य बन गया |

राजेन्द्र आर्य 9041342483