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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

सत्यार्थ प्रकाश की रक्षा हेतू

आज सत्यार्थ प्रकाश की रक्षा हेतू हमारे वीर योद्धा मैदान में ड्टे हैं| हम उनको बधाई देते हैं, कि वे अपना तन , मन , धन सब इस परम पुनीत कार्य में पूर्णतया लगा रहे हैं| साथ ही हम बाकी के सभी आर्य बन्धुओं से प्रार्थना करते हैं कि 'सत्यार्थ प्रकाश' की सम्मुजवल‌ प्रकाश धारा को तनिक भी कहीँ से धूमिल न होने दे| ऐसा व्रत लेकर‌ हम सब भी आगे बढ़ें,और इसमै अपनी,अपनी आहुती डाल ऋषि ऋण से कुछ तो उऋण‌ हो जाऐं|

आओ ऋषी के प्यारो
तुमको ऋषी बुलाता है
सत्य हेतु तन, मन, धन‌ देना
यह आवाज लगाता है

देखो ऋषि के प्यारे बच्चे
कैसे हैं उस पर बलि जाते
तुम भी कहीँ पिछड़ मत जाना
यह आवाज लगाता है

आज प्रहार हेतु पाखण्डी
उलटा चक्र चलाते हैं
आज सुदर्शन चक्र चला कर
उनको सबक सिखा देना

है सत्यार्थ प्रकाश हमारा
ऋषि का दिया हुआ वरदान
ज्ञान और अमृत का प्याला
सत्य धनों की है यह खान

इसकी और उठाए आँखे
ऐसे पाखण्डी जन को
ऐसा सबक सिखाएँ मिल सब
करे न फिर ऐसी बातें

और ज्ञान का सूर्य चमकता
सौतों को बतला देना
भारत की धरती पर फिर से
राम राज्य लौटा देना||