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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

राधा तो तुम्हारी मामी थी ,ये पत्नी उसे बताते है|

फिर से आ जाओ कान्हा इस देश में,ये भारत तुम्हे बुलाता है |
जन्मष्टमी का दिन याद तुम्हारी दिलाता है ||

ये सारे नकली भक्त तेरे तुझे माखन चोर बताते है |
जिसकी हजारों गौए हो क्या वो भी माखन चुराता है ?
...
राधा राधा कहते है माँ रुक्मणी का नाम नही लेते |
राधा तो तुम्हारी मामी थी ,ये पत्नी उसे बताते है|

तुम्हे भगवान भी कहते है ,और लांछन भी लगते है |
इन निर्लज्जो की बाते सुनकर पाप भी शर्माता है ||

ये कृष्ण जैसा तो बन न सके ,कृष्ण को अपने जैसा बना दिया |
रंग रास रचाकर कृष्ण की ये पैसा बहुत कमाता है ||

घर घर कंस हुए पैदा,गौओ पर आरा चलता है |
सुदर्शन चक्र लेकर आओ ,शिशुपाल बहुत इतराता है ||

तुम्हारी शिक्षा को भूल गए ,जो गीता में उपदेश दिया|
ये कृष्ण मुनि भी हे योगिन ,गीत तुम्हारे गाता है ||

Rajendra P.Arya
Sangrur (Punjab)
09041342483

Shri Rajendraji bahut hi

Shri Rajendraji
bahut hi joshili kavita hai.vichar na karna is desh ki kami hai.vidwan rashtrabhakto ko kuch to aisa karna chahiye ki jisase is desh ke aam vasi vichar karne par majboor ho jaay.

Dhanyavad!

राधा तो

राधा तो तुम्हारी मामी थी ,ये पत्नी उसे बताते है|
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Submitted by Rajendra P.Arya on Fri, 2012-06-08 08:49. भजन/कविता
फिर से आ जाओ कान्हा इस देश में,ये भारत तुम्हे बुलाता है |
जन्मष्टमी का दिन याद तुम्हारी दिलाता है ||

ये सारे नकली भक्त तेरे तुझे माखन चोर बताते है |
जिसकी हजारों गौए हो क्या वो भी माखन चुराता है ?
...
राधा राधा कहते है माँ रुक्मणी का नाम नही लेते |
राधा तो तुम्हारी मामी थी ,ये पत्नी उसे बताते है|

तुम्हे भगवान भी कहते है ,और लांछन भी लगते है |
इन निर्लज्जो की बाते सुनकर पाप भी शर्माता है ||

ये कृष्ण जैसा तो बन न सके ,कृष्ण को अपने जैसा बना दिया |
रंग रास रचाकर कृष्ण की ये पैसा बहुत कमाता है ||

घर घर कंस हुए पैदा,गौओ पर आरा चलता है |
सुदर्शन चक्र लेकर आओ ,शिशुपाल बहुत इतराता है ||

तुम्हारी शिक्षा को भूल गए ,जो गीता में उपदेश दिया|
ये कृष्ण मुनि भी हे योगिन ,गीत तुम्हारे गाता है ||

Rajendra P.Arya
Sangrur (Punjab)
09041342483