Skip navigation.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

BE HAPPY BE HEALTHY

ओ3म्
हंसते रहिए, स्वस्थ रहिए.
सुधा सावंत
पूज्य स्वामी राम देव जी भारत वासियों को स्वस्थ व प्रसन्नचित्त देखना चाहते हैं। इसी उद्देश्य से उन्होंने स्वस्थ भारत अभियान के अंतर्गत भारत वासियों को दूरदर्शन,आस्था एवं अन्य चैनलों व योग शिविरों के माध्यम से प्राणायाम व सामान्य आसन लगाना सिखाया। सही आसन लगाने व ठीक से प्राणायाम करने से शरीर रोग मुक्त हो सकता है,इस बात पर विश्वास जगाया। उन्हें अपने इस प्रयत्न में बहुत सफलता भी मिली है .जगह-जगह घरों में,पार्कों में, यहां-वहां एकांत में बैठे लोग प्राणायाम करते नजर आने लगे हैं। स्वस्थ भारत निर्माण के उद्देश्य से उन्होंने लोगों को प्राकृतिक-चिकित्सा के प्रति आस्थावान बनाया है। उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति से प्राकृतिक चिकित्सा करने के उद्देश्य से योग-ग्राम की स्थापना हरिद्वार के निकट की है।
हाल ही में हमें योग-ग्राम देखने का सौभाग्य मिला। पतंजलि योगपीठ के योग ग्राम के मुख्य चिकित्सक हैं। डाक्टर नागेन्द्र कुमार नीरज हम जब उनसे मिले तो बड़े ही सहज भाव से उन्होंने कहा—प्राकृतिक चिकित्सा का पहला सोपान है – हंसते रहिए। सुबह उठ कर पहला काम— ईश्वर को श्रद्धा पूर्वक याद करते हुए धन्यवाद दीजिए कि आप ठीक से उठे हैं, और तब पहले मुस्कराइए फिर जोर से हंसिए। स्वास्थ्य-लाभ का सिलसिला आरंभ हो जाएगा। डाक्टर नागेंद्र जी ने यह भी कहा कि स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक है कि हम जान लें कि भोजन की आवश्यकता शरीर को है मन को नहीं.हम भोजन शरीर को स्वस्थ रखने के लिए करें ना कि मन की मनमानी पर ध्यान दें। सुनकर बहुत ही अच्छा लगा शरीर स्वस्थ होगा तो मन अपने आप प्रसन्न रहेगा।
श्री योगेश कुमार जी इस योगग्राम के मुख्य प्रबंधन अधिकारी हैं सौम्य स्वभाव के बहुत ही कुशल कार्यकर्ता लगे हमें उन्होंने हमें बताया कि यहां प्राकृतिक उपचार के आधुनिकतम् साधन उपलब्ध हैं पंचभूतों से बने इस शरीर को प्राकृतिक-पंचकर्म चिकित्सा से स्वस्थ रखने का यहां पूर्ण प्रबंध है यहां जल-चिकित्सा अनुभाग,मिट्टी-चिकित्सा अनुभाग, सूर्य चिकित्सा अनुभाग, वायु चिकित्सा अनुभाग तथा प्रकाश चिकित्सा अनुभाग सहित अन्य अनेक उपभाग हैं, जहां एक्युपंक्चर तथा एक्यू प्रेशर द्वारा भी इलाज किया जाता है।
100 से 150 व्यक्ति तक यहां रहकर स्वास्थ्य-लाभ प्राप्त कर सकते हैं। दो तरह की यहां आवासीय-व्यवस्था है. ए.सी. लगे कमरों का किराया 1000 रु. प्रतिदिन है। इसमें आवास, चिकित्सा एवं भोजन की सुविधा मिली हुई है। तपस्वी कुटिया का किराया 700रु प्रतिदिन है, इसको कूलर के माध्यम से ठंडा किया जाता है। भोजन तथा चिकित्सा की सुविधा साथ ही उपलब्ध है.
श्री योगेश जी ने कुछ ऐसे लोगों से हमें मिलवाया जो स्वास्थ्य लाभ करने की आशा से यहां आए हुए थे। इनमें स्वदेश से व विदेश से भी आए हुए लोग थे। इंग्लैण्ड से आई अमृता शेरगिल ने हमें बताया कि वह इस योगग्राम में अभी तीन सप्ताह से हैं उनके पैर के स्नायुओं में परेशानी है जिससे उन्हें तेज भागने में परेशानी होती है। इसी के इलाज के लिए वह यहां आई हैं अमृता यहां मिल रहे उपचार व भोजन से संतुष्ट हैं स्वस्थ हो जाने के बाद दोबारा भी वे यहां आना पसंद करेंगी .कुछ समय बाद हम आबू रोड, राजस्थान के निवासी श्री रामेश्वर अग्रवाल जी से मिले। प्राकृतिक चिकित्सा के लिए वे अपने पुत्र के. के. अग्रवाल के साथ यहां आए थे .के .के अग्रवाल अपना वजन कम कराना चाहते हैं। उन लोगों के विचार से योग ग्राम प्राकृतिक चिकित्सा के लिए विश्व का श्रेष्ठतम् केन्द्र है यहां प्राकृतिक सौन्दर्य के बीच रहने का अवसर मिलता है और अन्य केन्द्रों की अपेक्षा इलाज भी सस्ता है।
डाक्टर नागेन्द्र जी के अनुसार प्राकृतिक चिकित्सा के लिए मुख्य ध्यान देने योग्य बातें है –
1 हम पथ्य पर बहुत ध्यान दें। पथ्य यानि भोजन। भोजन ठीक है तो दवा की जरूरत नहीं है और अगर भोजन ठीक नहीं तो भी दवा की जरूरत नहीं है क्योंकि ऐसी स्थिति में दवा कुछ असर ही नहीं करेगी .
2 सदा प्रसन्न रहने की कोशिश करें। हंसते हुए उन्होंने कहा कि पूर्णमद मंत्र को मैं इस तरह कहता हूं –
हास्यमद: हास्यमिदं हास्यात् हास्यमुदच्यते
हास्यस्य हास्यमादाय हास्यमेवावशिष्यते
यह भी कह सकते हैं ---या देवी सर्व भूतेषु हास्य रूपेण संस्थिता,नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम.
सदा हंसते रहिए इससे हर जगह सदा प्रसन्नता का वास रहेगा।
3 हमें यह भी याद रखना चाहिए कि सभी जीव धारियों में स्वयं रोगमुक्त होने की प्रबल इच्छा शक्ति होती है .इसी शक्ति के कारण हमारा शरीर क्रियाशील है इस शक्ति को जीवनीशक्ति कहते हैं .यह स्वास्थ्य बढाने वाली रक्षा करने वाली और रोग से मुक्ति दिलाने वाली शक्ति है।
4 मानसिक तनाव ,चिन्ता ,अतिश्रम ,अति भोजन ,रात्रि-जागरण आदि कुछ ऐसी प्रवृत्तियां हैं जो जीव को रोगी बनाती है, हमें इनसे बचना चाहिए।
5 मन शरीर से अधिक बलवान है इसे और शक्तिशाली बनाएं क्योंकि मन ही रोगी मन ही चिकित्सक, मन से बडा न कोय, यदि हम सोच लें कि हम स्वस्थ हैं तो सच में सब काम कर सकते हैं ।
यही सब चर्चा करते कराते हमने योगग्राम में कुछ समय और बिताया.योगग्राम के बारे जानकारी प्राप्त करना हमारे लिए एक सुखद अनुभव रहा .हमें बहुत समय तक याद रहेगा ,चर्चा का विषय रहेगा ।
सुधा सावंत, एम ए, बी एड
609,सेक्टर 29. अरूण विहार, नोएडा-201303
Email: Sanskrit.sudha@gmail.com