Skip navigation.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

वेद अमृत

वेद अमृत

बरस रहा- बरस रहा दरबार , अमृत वेदों का !

१.वेद ज्ञान कि सच्ची पुस्तक ! सब दे दिलां ते – देवे दस्तक !
यहाँ है जीवन का आधार –अमृत वेदों का ! बरस रहा ...........

२.वेद के मन्त्र- हीरे मोती ! जिस तों मिल जाए- जीवन ज्योति !
भरे सुखों के भण्डार – अमृत वेदों का ! बरस रहा........

३.वेदों में कोई- कमी नहीं है ! बिन इसके कोई धनी नहीं है !
यही खोले दशम द्वार – अमृत वेदों का ! बरस रहा............

४.वेद पढ़ो और, वेद पढाओ ! घर-२ वेद की, ज्योति जलाओ !
जिसदी पूजा करे संसार – अमृत वेदों का ! बरस रहा बरस रहह दरबार ....

५.खुद पियो औरों को पिलाओ ! ज्ञान की गंगा में, गोता लगाओ !
करदे जीवन नैया पार – अमृत वेदों का ! बरस रहा.......

६.उत्तर दक्षिण, पूर्व पश्चिम ! लहरा दो तुम, वेद का परचम !
ऐसा “रत्न” करो प्रचार – अमृत वेदों का ! बरस रहा ...........

लेखक, गायक, संगीतकार: रत्न लाल मांडला , संगरूर (पंजाब)
Mobile: 09144-01573

09814401573

09814401573