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AryasamajOnline |
सर्वश्रेष्ठ धनसर्वश्रेष्ठ धन ओ3म् समुद्र ईशे स्रवतामग्निः पृथिव्या वशी। शब्दार्थ- (स्रवताम्) बहने वाले जलों, नदी-नालों पर (समुद्रः) समुद्र (ईशे) शासन करता है (पृथिव्याः) पृथिवी पर उत्पन्न होने वाले पदार्थों को (अग्निः) अग्नि (वशी) वश में किये हुए है (नक्षत्राणाम्) नक्षत्रों में (चन्द्रमा) चन्द्रमा (ईशे) सब पर शासन करता है, उन्हें अपने तेज से दबा लेता है, उसी प्रकार हे मनुष्य ! तू सम्पर्ण प्राणियों में (एक-वृषः) एकमात्र सर्वश्रेष्ठ (भव) बन, बनने का प्रयत्न कर। भावार्थ - 1. बहने वाले नदी-नालों को देखिये और समुद्र के ऊपर एक दृष्टि डालिए। समुद्र अपनी विशालता, गहनता, गम्भीरता और महान् जलराशि के कारण सभी नद और नदियों पर शासन करता है। समुद्र सभी नदी-नालों में ज्येष्ठ और श्रेष्ठ है। Rajendra P.Arya
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