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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

दर्शन योग महाविद्यालय (रोजड़) का सर्वाधिक भव्य और महत्त्वपूर्ण प्रकाशन

दर्शन योग महाविद्यालय (रोजड़) का सर्वाधिक भव्य और महत्त्वपूर्ण प्रकाशन

ग्रंथ का नाम - "बृहती ब्रह्ममेधा"
(२००३ में रोजड़ में आयोजित उच्च स्तरीय त्रैमासिक योग प्रशिक्षण में प्रदत्त प्रसिद्ध योग साधक एवं महान दार्शनिक विद्वान पू० स्वामी सत्यपति जी परिव्राजक के प्रवचनों का अपूर्व संग्रह, ग्रन्थ की भाषा - हिंदी)

संकलयिता एवं संपादक - श्री सुमेरुप्रसाद दर्शनाचार्य

कुल तीन भाग - पृष्ठ संख्या ५८० + ६५६ + ६६४ = १९००

पृष्ठ साईज़ - २३ से०मी० * २८.५ से०मी०

प्रथम संस्करण - मई २०१२

मूल्य - ८०० रुपये (तीनों भाग)

आशा है कि देश-विदेश के आर्य समाज, आर्य संस्थाएं, गुरुकुलें, विद्यालयें, आर्य समाज के प्रचारक तथा उपदेशक एवं जिज्ञासु योग साधक इस उत्कृष्ट ग्रन्थ को मंगाकर, उसे मनोयोगपूर्वक पढ़कर, वेदों की - ऋषियों की योगविद्या को ठीक से जानकर, उसे अपने जीवन में साक्षात्कार के स्तर पर ले जाने का प्रयास करेंगे ।
वेद तथा वैदिक ग्रन्थों में वर्णित सनातन योग विद्या को आत्मसात् करने के लिए यह ग्रन्थ का अध्ययन करना आवश्यक है । ग्रन्थ प्रकाशन का तात्पर्य यही है । ग्रंथ सभी दृष्टियों से उत्तम है, आकर्षक है ।

ग्रन्थ-प्राप्ति हेतु सम्पर्क सूत्र:
दर्शन योग महाविद्यालय (रोजड़), आर्यवन, पत्रा० सागपुर, जि० साबरकांठा, गुजरात - ३८३३०७
फोन: +91(02770) 287418, 287518
Mobile: +91-94094 15011, 94094 15017
e mail: darshanyog@gmail.com
website: www.darshanyog.org

भावेश मेरजा