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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

ईश्वर से इच्छा - मूल स्तुति आर्य्याभिविनय से

मयीदमिन्द्र इंद्रियं दधात्वस्मान् रायो मधवानः सचन्ताम् ।
अस्माकम् सन्त्वाशिषः सत्या नः सन्त्वाशिषः ॥51॥
यजुर्वेद २।११॥
व्याख्यान - हे इन्द्र परमैश्वर्यवन ईश्वर ! "मयि" मुझमें विज्ञानादि शुद्ध इन्द्रिय "रायः" और उत्तम धन को "मधवानः" परम धनवान आप "सचन्ताम" सद्यः प्राप्त करो, हे सर्व काम पूर्ण करनेवाले ईश्वर ! आपकी कृपा से हमारी आशा सत्य ही होनी चाहिए, (पुनरुक्त अत्यन्त प्रेम और त्वरा द्योतनार्थ है) हे भगवन् ! हम लोगों की इच्छा आप शीघ्र ही सत्य कीजिये , जिससे हमारी न्याययुक्त इच्छा के सिद्ध होने से हम लोग परमानन्द में सदा रहैं ॥५१॥