Skip navigation.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

गीत स्तुति (आर्याभिविनय‌ - (३) )

गीत स्तुति (आर्याभिविनय‌ - (३) )
ViewEdit
ओ३म् अग्निना रयिमश्नवत्पोषमेव दिवे दिवे।
यशसं वीरवत्तमम् ।। 3 ।। ऋग्वेद १/१/१/३ ।।

इस अग्नि प्रकाशित प्रभु का, प्रिय प्रभा पोष पा जाऊँ ।
वरदान देव दो, अनुदिन, सुख सुयश पोष पाजाऊँ ।।

आत्मा देह की पुष्टि करो
वीरता वीर्य की वृष्टि करो
सुखमय यह सारी सृष्टि करो

शूरवीर विद्वानों का, तप तीव्र तोष पा जाऊँ ।
वरदान देव दो, अनुदिन, सुख- सुयश पोष पा जाऊँ ।।

विधि विद्दा स्वर्ण सम्पदा दो
रवि राज्य भूमि बहु सुखदा दो
ईश्वर सत्कीर्ति सर्वदा दो

सुदृढ़ देह वीरत्व विमल्, निर्दोष घोष पा जाऊँ ।
वरदान देव दो, अनुदिन, सुख- सुयश पोष पा जाऊँ ।।

प्रिय पोषमेव सम्पत्ति रयिम्
वीरत्व पराक्रमयुत संयम
भगवान हमें दो कीर्ति प्रियम

हे तेजरूप, अग्नेश्वर, तब कृपा कोष पा जाऊँ ।
वरदान देव दो, अनुदिन, सुख- सुयश पोष पा जाऊँ ।।

राजेन्द्र आर्य‌
362-A, guru Nanak Pura,
Sunami Gate,
SANGRUR-148001 (Punjab)
Mobile: 09041342483