Skip navigation.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

गीत स्तुति २

गीत स्तुति २
ViewEdit
ओ३म् अग्निमीले पुरोहितं यज्ञस्य देवमृत्विजम् ।
होतारं रत्नधातमम् ।। (ऋग्वेद १/१/१/१)

व्यापक प्रकाश विस्तारक, यह गीत वन्दना तेरी ।
प्रभु अग्नि पुरोहित होता, कर ग्रहण वन्दना मेरी ।।

पितु ईश्वर का उपदेश प्रथम
उस पितु का मान करें तुम हम
हैं अग्नि ज्योति ईश्वर अनुपम

देवस्तुति अग्र गाम्य की, यह गीत अर्चना मेरी ।
प्रभु अग्नि पुरोहित होता, कर ग्रहण वन्दना मेरी ।।

तुम सर्व पुरोहित हित साधक
कमनीय यज्ञ के निष्पादक
ऋतु ऋतु नूतन सुख सम्पादक

शिल्प कला संघर्ष मध्य, सुन देव कामना मेरी ।
प्रभु अग्नि पुरोहित होता, कर ग्रहण वन्दना मेरी ।।

हर योग क्षेम के तुम होता
हर रत्न सम्पदा के स्त्रोता
हम पुत्र पिता के स्तोता

मेरे पथ दर्शक नायक, यह गीत याचना तेरी ।
प्रभु अग्नि पुरोहित होता, कर ग्रहण वन्दना मेरी ।।

राजेन्द्र आर्य‌
362-A, Gurunanak Pura,
Sunami Gate,
SANGRUR(PUNJAB)
Mobile: 09041342483
‹ सामवन्दना : प्रिया प्रियाओं में गीतस्तुति (आर्याभिविनय १ ) ›.By Rajendra P.Arya at 2011-09-05 09:11साम वन्दना