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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

Mantra of the day

आ त्वा विशन्त्वाशव:सोमास इन्द्र गिर्वण:।शन्ते सन्तु प्रचेतसे।(ऋ।१।२।५।७)

भावार्थ:ईशवर ऐसे मनुष्यों को आशिर्वाद देता है कि जो मनुष्य विद्वान परोपकारी होकर अच्छी प्रकार नित्य उद्योग करके इन सब पद्दर्थों से उपकार ग्रहण करके सब प्राणियों को सुखयुक्त करता है,वही सदा सुख को प्राप्त होता है,अन्य कोई नही।

(महर्षि दयानन्द ऋग्वेद भाष्य)