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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

Mantra of the day(Vedic thought of the day)

त्वं नो अस्या इन्द्रं दुर्हणाया:पाहि वज्रिवो दुरीतादभीके।प्र नो वाजान रथ्यो३ अश्वबुध्यानिषे यन्धि श्रवसे सुनृतायै॥(ऋ।१।१८।१२१।१४)

भावार्थ:-सेनाधीश को चाहिये कि अपनी सेना को शत्रु को मारने से और दुष्ट आचरण से अलग रक्खे तथा वीरों के लिये बल तथा उनकी इच्छा के अनुकूल बल के बढानेवाले पीने योग्य पदार्थ तथा पुष्कल अन्न दे,उनको प्रसन्न और शत्रुओं को अच्छी प्रकार जीत कर प्रजा की निरन्तर रक्षा करें।

(महर्षि दयानन्द ऋग्वेद भाष्य)