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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

निद्रा:मेरा अनुभव

मैंने निद्रा के बारे में बहुत पढा और अपने जीवन में इसे देखा।मैंने यह पढा कि निद्रा शरीर को स्वस्थ रखने के लिये एक महत्त्वपुर्ण साधन है।फिर मैंने इसे हकीकत में जानने के लिये शोध किया।मैंने कभी नींद अधिक ली तो कभी कम ली।बज भी मैंने कम नींद ली तब मैं पुरे दीन भर उबासी लेता रहा और पढाई भी नहीं हुई।मैंने पाया कि कम नींद की वजह से मेरी आंखों के नीचे कालापन आ गया है।और चेहरा बहुत बद्सूरत हो गया है।मैं विचार करने में असमर्थ हूँ और ठीक से सुन भी नहीं पा रहा हूँ।ऐसा मैंने पाया।

परन्तु जब मैंने पूरी नीन्द ली तो मैंने पाया कि मुझे उबासी नहीं आ रही है और पढाई बडे आराम से हो रही है।और आँखों के नीचे वाला कालापन भी गायब हो गया है।मुझे एक और अनुभूति हुई कि मैं अपने आप को स्वस्थ महसूस कर रहा हूँ।अत: यह सिद्ध भी हो जाता है कि निद्रा शरीर को स्वस्थ,सुन्दर व दृढ बनाने का एक साधन है।पूरी निद्रा लेने वाला व्यक्ति फुर्ति से काम करते है तथा उसे जल्द ही याद भी हो जाता है।

कुछ सिद्ध-विद्ध कहते हैं कि निद्रा समाधि में बाधक है।अत: वे निद्रा नहीं लेते हैं।वे अपने आप की बहुत हानि करते हैं।योग में कहा है कि निद्रा चित्त की पांच वृत्तियॉ में से एक है और सभी वृत्तियॉ को रोक देने से समाधि लग जाती है।किन्तु हमें इससे यह नहीं समझना चाहिये कि निद्रा नहीं लेनी चाहिये।जब समाधि लगायेंगें तब निद्रा रोकेंगें।हर समय समाधि थोडी लगती है।