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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

Mantra of the day(Vedic thought of the day)

वेदों के अनुसार आकाशीय बिजली और राजपुरुषों का कार्य:

त्यं चिद घा दीर्घं पृथुं महो नपातममृध्रम।प्र च्यावयन्ति यामभि:॥(ऋ।१।८।३७।११)

भावार्थ:-राजपुरुषों को चाहिये कि जैसे पवन ही मेघ के निमित्त बहुत जल को ऊपर पहुंचा कर परस्पर घिसने से बिजुली को उत्पन्न कर उस न करने योग्य तथा न गीला करने और बडे आकार वाले मेघ को भूमि पर गिराते हैं,वैसे ही धर्मविरोधी सब व्यवहारों को छोडें और छुडावें।

(महर्षि दयानन्द ऋग्वेद भाष्य)