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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

Mantra of the day(Vedic thought of the day)

अस्मान्त्सु तत्र चोदयेन्द्र राये रभस्वत:।तुविद्युम्न यशस्वत:॥(ऋ।१।३।९।६)

भावार्थ:-सब मनुष्यों को उचित है कि इस सृष्टि में परमेश्वर की आज्याँ के अनुकूल वर्त्तना तथा पुरुषार्थी और यशस्वी होकर विद्या तथा राजलक्ष्मी की प्राप्ति के लिये सदैव उपाय करें।इसी से उक्त गुण वाले पुरुषों ही को लक्ष्मी से सब प्रकार से सुख मिलता है,क्योंकि ईश्वर ने पुरुषार्थी सज्जनों ही के लिये सुख रचे हैं।

(महर्षि दयानन्द ऋग्वेद भाष्य)