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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

Proof from vedas and maharshi dayanand that gautam buddha was not mahatma

ऋग्वेदादीभास्यभूमिका के सृष्टि विद्या विषय में लिखा है -
" रुचं ब्राह्मं जनयन्तो देवाs अग्रे तदब्रुवन् ।
यस्त्वैवं ब्राह्मणो विद्यात् तस्य देवाs असन् वशे ॥
भाष्यम्-- (रुचं ब्राह्मं॰) रुचं प्रीतिकरं ब्राह्मं ब्रह्मणोंsपत्यमिव
ब्रह्मणः सकाशाज्जातं ज्ञानं जनयन्त उत्पादयन्तो......पश्चात तस्यैव
ब्रह्मविदो ब्राह्मणस्य देवा इंद्रियाणि वशे असन भवन्ति नान्यस्येति
॥21॥
भावार्थ -- जो ब्रह्म का ज्ञान है वही अत्यंत आनंद करनेवाला और उस मनुष्य
की उसमे रुचि का बढ़ानेवाला है । जिस ज्ञान को विद्वान लोग अन्य मनुष्यों
के आगे उपदेश करके उनको आनंदित कर देते हैं । जो मनुष्य इस प्रकार से
ब्रह्म को जानता है , उसी विद्वान के सब मन आदि इंद्रिय वश में हो जाते
हैं , अन्य के नहीं ॥21॥ "

प्रश्न -- क्या उपरोक्त मंत्र से यह सिद्ध नहीं होता कि गौतम बुद्ध
वैराग्यवान नहीं था ? महर्षि दयानन्द जी ने विशेष रूप से "नान्यस्येति "
लिखकर क्या यह उपदेश नहीं दिया है कि केवल और केवल उन्ही की इंद्रिय संयम
में होती है जिनको ब्रह्म का ज्ञान होता है ? गौतम बुद्ध विवाहित था
राजकुमार था । कई स्त्रियॉं के बीच रहता था । भोग करता था । यह बात ठीक
है की उसने घर छोड़ दिया था । लेकिन क्या उसका मन इस योग्य था की वह उन
स्मृतियों को बिना ब्रह्म के ज्ञान के नष्ट कर सके ? योग दर्शन में लिखा
है कि -
दृष्टानुश्रविकविषयवितृष्णस्य वशीकारसंज्ञा वैराग्यं॥१५॥
"अनुभव किए हुए और सुने हुए विषयों की तृष्णा से रहित योगी की मन पर
वशीकरण की अनुभूति (अपर) वैराग्य कहा जाता है । "

ॐ..It's very unfortunate

ॐ..It's very unfortunate that some so called sanyasis of arya samaj believes that gautam buddha was purna vairagyawan. That's childish . Learned of vedas can not accept him as a vairagyawan person. The problem is this that those so called sanyasi have very much ego. Ego has weaken their intellect. That's why they are spreading stupid anti vedic messages. Some so called sanyasi are very boast of their knowledge . They are spreading khullam khulla that they are the best teacher of darshan. Some so called sanyasi are even very funny ! They say "Maine maharshi patanjali ka yog darshan padha hai. Kitne bar ? 200 bar ! Maharshi vyas ka vedant darshan bhi padha hai kitne bar ? 150 bar ! Maharshi jaimini ka mimansa darshan bhi padha hai kitni bar ? 250 bar ! Maharshi gautam ke bhi nyay darshan par bhi bahut mehnat ki hai ise bhi 150 bar padha hai. Charon vedon ke sar wali pustak ko bhi bar bar padha hai ! Etc." and they called themselves yogi ! Lol .