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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

Mantra of the day(Vedic thought of the day)

स्यूमना वाच उदियर्तिवह्नि: स्तवानो रेभ उषसो: विभाती:।अद्या तदुच्छ गृणते मघोन्यस्मे आयुर्नि दिदीहि प्रजावत॥(ऋ।१।१६।११३।१७)

भावार्थ:जब स्त्री-पुरुष सुहृदभाव से परस्पर विद्या और अच्छी शिक्षाओं को ग्रहण कर उत्तम अन्न,धनादि वस्तुओं का संचय करके सूर्य के समान न्याय धर्म का प्रकाश कर सुख में निवास करते हैं तभी गृहाश्रम के पूर्ण सुख को प्राप्त होते हैं।

(महर्षि दयानन्द ऋग्वेद भाष्य)