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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

Mantra of the day(Vedic thought of the day)

ऋतावानं महिषं विश्वदर्शतमग्नि सुम्नाय दधिरे पुरो जना:।श्रुतकर्ण सप्रथस्तमं त्वा गिरा दैव्यं मानुषा युगा।(यजु।१२।१११)

भावार्थ:-जो सत्पुरुष हो चुके हों,उन्हीं का अनुकरण मनुष्य लोग करें,अन्य अधर्मियों का नहीं।

(महर्षि दयानन्द यजुर्वेद भाष्य)