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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

Mantra of the day(Vedic thought of the day)

विद्या शरस्य पितरं सूर्यं शत्वृष्ण्यम।तेना ते तन्वे३ शं करं ते पृथिव्यां निषेचनं वहिष्टे अस्तु बालिति॥(अथर्व।१।१।३।५)

भावार्थ:सूर्य आकाश में वायु से चलता है और लोकों को चलाता तथा वृष्टि आदि उपकार करता एवं बडा तेजस्वी है।वह परब्रह्म उस सूर्य का भी सूर्य है।उसके उपकारों को जानकर तेजस्वी मनुष्य परस्पर उन्नति करते हैं।

(श्री पं क्षेमकरणदास त्रिवेदी कृत भाष्य)