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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

तर्क से विश्वास घटता है किन्तु बढता भी है।

तर्क से विश्वास घटता है किन्तु बढता भी है।

जो तर्क नहीं करता है उसकी बुद्धि निम्न प्रकार की होती है:-
वह व्यक्ति अन्धेरे को रोशनी और रोशनी को अन्धेरा समझता है।जिस वजह से जब काम करना होता है तब अन्धेरे में बैठता है और जब सोना होता है तब रोशनी में सोता है।तब बिचारा वह न तो काम कर पाता है और न ही सो पाता है।

जो व्यक्ति तर्क नहीं करता है उसे यदि कहा जाय कि तू कुए में कूद तो वह कुएँ में कूद कर प्राण न्योछावर कर देता है।क्योंकि वह यह नहीं सोचता कि कूएँ में कूदने से आदमी की मृत्यु हो जाती है।और मृत्यु के बाद वह कुछ भी काम नहीं कर पाते हैं।

जो तर्क करता है उसकी बुद्धि निम्न प्रकार की होती है:-
वह व्यक्ति अन्धेरे को अन्धेरा और रोशनी को रोशनी समझता है।जिस वजह से जब वह काम करता है तो रोशनी में बैठता है और जब निद्रा लेनी होती है तो अन्धेरे में बैठता है।जिस वजह से वह काम भी कर पाता है और सो भी पाता है।

जो तर्क करता है उसे बहकाया नहीं जा सकता है।क्योंकि वह तर्क से जान लेता है कि झूठ क्या है और सच क्या है।

जो तर्क करता है वह अन्धेरे को अन्धेरा ही समझता है।जब भी वह सोचता है कि क्या अन्धेरा उजाला है भी या नहीं तो वह झट से सोचता है कि अन्धेरे में दिखायी नहीं देता है और उजाले में दिखायी देता है तो वह कहता है कि अन्धेरे में उजाले के गुण नहीं है इसलिये अन्धेरा उजाला नहीं होता है।तो उसक विश्वास फिर से दृढ हो जाता है कि अन्धेरा अन्धेरा ही होता है।अत:तर्क से सत्य में विश्वास बढता है।किन्तु जो ऊपर लिखित तर्क न करे तो वह सोचता है कि अन्धेरा शुभ और उसमें उजाला होता है।किन्तु तर्क वाले का तर्क की वजह से झूठ में विश्वास घट जाता है।अब आपको यह सोचना है कि आपको सच में विश्वास बढाना है या फिर झूठ में।यदि सच में बढाना है तो खूब करे।परन्तु यदि झूठ में बढाना है तो वह तर्क न करे।

आजकल कुछ लोग कहते हैं कि तर्क करना सफलता में बाधक है।क्योंकि उससे विश्वास घटता है।परन्तु वे यह नहीं जानते कि तर्क से विश्वास झूठ में घटता है सच में नहीं।सच में विश्वास बढने से व्यक्ति सफलता प्राप्त करता है।तो आज से खूब तर्क करें विचारें मनन करें खुल कर।यदि इससे किसी के मत का खण्डन होता है तो आपको यह समझना चाहिये कि वह मत झूठा है।और झूठे मत का तो खण्डन होना ही चाहिये।इसलिये तर्क खूब करें।सच में विश्वास अपने आप पैदा होता है।क्योंकि जिस व्यक्ति में जैसा विचार आवे वह उसी में विश्वास रखता है।