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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

धरती की शान तू है मनु की सन्तान

धरती की शान तू है मनु की सन्तान
तेरी मुट्ठियों में बंद तूफ़ान है रे
मनुष्य तू बड़ा महान है भूल मत

तू जो चाहे पर्वत पहाड़ों को फोड़ दे
...तू जो चाहे नदियों के मुख को भी मोड़ दे
तू जो चाहे माटी से अमृत निचोड़ दे
तू जो चाहे धरती से अम्बर को जोड़ दे
अमर तेरे प्राण मिला तुझको वरदान
तेरी आत्मा में स्वयं भगवान है

नैनों में ज्वाल तेरी गति में भूचाल
तेरी छाती में छिपा महाकाल है
धरती के लाल तेरा हिमगिरी सा भाल
तेरी भृकुटी में तांडव का ताल है
निज को तू जान जरा शक्ति पहचान
तेरी वाणी में युग का आह्वान है

धरती सा धीर तू है अग्नि सा वीर
अरे तू जो चाहे काल को भी थाम ले
पापों का प्रलय रुके पशुता का शीश झुके
तू जो अगर हिम्मत से काम ले
गुरु सा मतिमान पवन सा तू गतिमान
तेरी नभ से भी ऊँची उडान है रे

SENDER:

RAJENDRA ARYA
SANGRUR (PUNJAB)

9041342483