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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

दुनियां वालो देव दयानंद

दुनियां वालो देव दयानंद दीप जलाने आया था |

भूल चुके थे राहें अपनी वह दिखलाने लाया था |टेक

घोर अँधेरा जग में छाया नजर नही कुछ आता था |
...
मानव मानव की ठोकर से जब ठुकराया जाता था |

आर्य जाति सोई पड़ी थी घर घर जा के जगाता था |

दुनियां वालो देव दयानंद दीप जलाने आया था |१

बंट गया सारा टुकड़े टुकड़े भारत देश जागीरो में |

शासन करते लोग विदेशी जोश नही था वीरो में |

भारत माँ को मुक्त किया जो जकड़ी हुयी थी जंजीरों में |

दुनिया वालो देव दयानंद दीप जलाने आया था |२

जब तक जग में चार दिशाएं कुदरत के ये नजारे है |

सागर,नदियां,धरती ,अम्बर ,जंगल ,पर्वत सारे है |

पथिक रहेगा नाम ऋषि का जब तक चाँद सितारे है |

दुनिया वालो देव दयानंद दीप जलाने आया था |

भूल चुके थे राहें अपनी वह दिखलाने आया था |३

SENDER:

RAJENDRA ARYA
SANGRUR (PUNJAB)
9041342483