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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

सुखधाम सदा तेरा नाम सदा

सुखधाम सदा तेरा नाम सदा,

कोई तुझसा और महान नहीं | सुखधाम.....

कण कण में रमा, घट घट में बसा
...
तेरा अपना कोई मकान नहीं | सुखधाम.....

कोई दींन दुखी जो पुकारे तुझे

सुनता है प्रभु तु सदा उसकी

तुझे कहते हैं नाथ दयालु सभी

कोई तुझसा दयानिधान नहीं | सुखधाम.......

तुने यूँ तो रचाए जमीं आसमाँ

पर्वत सागर बहती नदियाँ

पर ढूंढने तुझको जाएँ कहाँ

तेरा पता व कोई निशान नहीं | सुखधाम......

हे जगत पिता हे जगत पति

कोई जान सका न तुम्हारी गति

क्या योगी यति क्या साधू सती

कोई दूजा तेरे समान नहीं | सुखधाम.......

तेरा नाम जपूँ प्रभु ये वर दो

बेमोल की अब झोली भर दो

करूणानिधि अब करुणा कर दो

कोई तुझसा करुणानिधान नहीं | सुखधाम.......

SENDER:

RAJENDRA ARYA
SANGRUR (PUNJAB)
9041342483