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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

तुम्हारे दिव्य दर्शन की मैं इच्छा ले के आया हूँ

तुम्हारे दिव्य दर्शन की मैं इच्छा ले के आया हूँ /
पिला दो प्रेम का अमृत पिपासा ले के आया हूँ //

रत्न अनमोल लाने वाले लाते भेंट को तेरी /
मैं केवल आंसुओं की मंजू माला ले के आया हूँ //
...
जगत के रंग सब फीके तू अपने रंग में रंग दे /
मैं अपना यह महाबदरंग बाना ले के आया हूँ //

'प्रकाशानंद' हो जाये मेरी अँधेरी कुटिया में /
तुम्हारा आसरा विश्वास आशा ले के आया हूँ //

SENDER:

RAJENDRA ARYA
SANGRUR (PUNJAB)
9041342483

पाखण्ड पर

पाखण्ड पर अच्छा प्रहार।आप और भी करते रहें।

Your friend
Vinay Arya
Managalpura(vill.),Ladnun(Teh)
Nagaur(Dist.),Rajasthan(State)
India(count.),Continent(Asia)
THE MOTHER EARTH(Planet)