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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

सगुण और निर्गुण उपासना क्या हैं?

गुण दो प्रकार के होते हैं।एक अच्छे व दूसरे बुरे।सगुण का अर्थ है गुणों के साथ।अर्थात हम ईश्वर की स्तुति उसके गुणों के साथ करें।जैसे हे इश्वर आप बहुत दयालु हैं,आप सर्वशक्तिमान है।और निर्गुण स्तुति में ईश्वर के गुणों को न बताकर उसका गुणगान किया जाता है।जैसे ईश्वर कभी झूठ नहीं बोलता है,ईश्वर कभी बलात्कार नहीं करता है इत्यादि।कृपया सत्यार्थ प्रकाश और महर्षि दयानन्द जी के ग्रन्थों का स्वाध्याय थोडा सा भी किया करें।प्रतिमा शब्द को यहाँ न घुसेडें।कुछ लोग सगुण उपासना का सहारा लेकर मूर्त्तिपूजा को बनाये रखना चाहते हैं।