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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

वेदों में नियोग

माननीय श्री संजीव नेवर जी ने अग्निवीर नाम की एक वेबसाईट बनाई है।उसपर वे वेदों और दलितोद्धर की बात तो करते हैं किन्तु वे शायद यह नहीं बताना चाहते हैं कि उनके प्रेरक कौन है।वे इस बात को पूर्णत: छुपाना चाहते हैं।क्या सत्य के राही को अपनी कोई बात छुपानी चाहिये?वे वेदों को ईश्वरीय ग्रन्थ तो मानते हैं किन्तु वे शायद यह भूल जाते हैं कि वेदों को ईश्वरीय ग्रन्थ घोषित करने का अदम्य साहस किसने किया था।वे भूल जाते हैं कि वेदों के लिये किसने १७-१७ बार जहर पिया था।उनका कहना है कि वेदों में नियोग का किन्चित भी वर्णन नहीं है।मैंने वेद का एक मन्त्र भी उनको दिया "इमां त्वमिन्द्र मीढ्व: सुपुत्रां सुभगां कृण।दसास्यां पुत्राना धेहि पतिमेकादशं कृधि॥(ऋ१०।८५।४५)

इसमें आये शब्द "पतिमेकादशं कृधि" यही कहते हैं कि स्त्री वा पुरुष ११ तक जा सकते हैं।क्योंकि यहाँ साफ-साफ एकादश शब्द इस सन्दर्भ में आया है।वेदों में तो साफ साफ नियोग के बारे में लिखा है।"किन्तु उन्होने मेरे पूरे लेख को काट डालने का अभूतपूर्व साहस किया।वे महर्षि दयानन्द को न ही कोई महापुरुष मानते हैं न ही कोई ऋषि।मुझे तो वे कोई साधारण से व्यक्ति लगते हैं जो कि आर्य समाज और महर्षि दयानन्द के बारे में नाम मात्र की रुचि रखते हैं।किन्तु कुछ आर्य भाई उनसे धोखा खाकर उन्हें एक आर्य विद्वान के रूप में मानते हैं।किन्तु ये कैसे आर्य विद्वान हैं जो कि आर्य समाज को एक संप्रदाय मानते हैं।मैं उनके बारे में अधिक जानकारी नहीं रखता हूं और अब तो इच्छा भी नहीं रही।तो मैं आपको चेत करता हूँ कि उनके लेख प्रमाण के योग्य नहीं हो सकते हैं।क्योंकि वे अपने लेखों में अनेक बार अंधविश्वास और मूर्तिपूजा में विश्वास भी व्यक्त कर चुके हैं।माना जाता है कि उन्होने लगभग २००० मुसलमानो को फिर से हिन्दु बनाया।मुझे तो यह बात भी मिथ्या लगती है।और यदि बनाया भी तो बहुत ही थोडा प्रयास किया आपने और अपने आप को न जाने कितना बडा महापुरुष भी मानने लग गये।

अरे!स्वामी श्रद्धानन्द ने तो लाखों मुसलमानों को फिर से हिन्दु बनाया था।आप तो बस दो चार मे ही रह गये।मैं आर्य समाज से निवेदन करता हूँ कि दुनिया मे उसके सिद्धन्तों को न कोई जानता है न कोई मानता है पर वे सिद्धान्त एकदम सत्य है।अत: जो भी आर्य है वह अपने आर्य विचारों को विस्तार देने का भरसक प्रयास करे।हमारी मदद हमारे अलावा और कोई नहीं कर सकता है।(वे तो हिन्दु शब्द पर जोर देते हैं जिसका मतलब होता है काला काफिर चोर आर्य को तो उन्होने भुला ही दिया है।)