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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

जिसकी सत्य में प्रीति नहीं होती है उसकी बुरी हालत होती है

आजकल लोग यह कहते हैं कि सत्य को जानकर हमको क्या लाभ मिलने वाला है।सत्य तो मूर्ख लोग मानते हैं।जो बडा होता है वह सत्य को नहीं मानता है।अब उन लोगो से जरा एक प्रश्न करो कि यदि उन्हें कोई कह दे कि तुम अपनी आंख फोड और ईश्वर तुम्हें दीख जायेगा,तो क्या तुम उसे मान लोगे?वो कहेंगें नहीं।फिर उनसे पूछे कि क्यों नहीं मानोगे?तो वे कहेंगें कि यह बात तो सर्वथा असत्य है।तो इसलिये हमें सत्य में ही प्रीति करनी चाहिये झूठ का डटकर विरोध ही करना चाहिये जिससे कि झूठ समाज में न फैले।